ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट फिर मौन, वैधता पर फैसला टला, राष्ट्रपति की शक्तियों पर गहराता संदेह

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर फैसला एक बार फिर टाल दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख नहीं बताई। सुनवाई के दौरान जजों ने संकेत दिए थे कि उन्हें 1977 के IEEPA कानून के तहत टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों पर संदेह है। ट्रंप प्रशासन अधिकार होने का दावा कर रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी व्यापार नीति और कार्यपालिका की शक्तियों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

Jan 20, 2026 - 22:33
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ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट फिर मौन, वैधता पर फैसला टला, राष्ट्रपति की शक्तियों पर गहराता संदेह
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर अपना फैसला एक बार फिर टाल दिया। अदालत ने अगली सुनवाई की कोई तारीख घोषित नहीं की है, जिससे यह मामला अनिश्चितता में बना हुआ है। मंगलवार को कोर्ट ने तीन अन्य मामलों में फैसले सुनाए, लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीति से जुड़े इस बहुप्रतीक्षित और विवादास्पद मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं दिया।

यह लगातार दूसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर निर्णय रोक दिया है। इससे पहले भी अदालत ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लगाए गए इन टैरिफों ने वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर डाला है। आलोचकों का कहना है कि इन शुल्कों ने न केवल अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों, बल्कि उसके पारंपरिक सहयोगियों के साथ भी व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा किया है।

राष्ट्रपति की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट को संदेह

इस मामले की सुनवाई 5 नवंबर 2025 को हुई थी। उस दौरान जजों की टिप्पणियों से संकेत मिला था कि सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या राष्ट्रपति के पास 1977 के कानून के तहत इस पैमाने पर टैरिफ लगाने की वैधानिक शक्ति है। यह कानून आपातकालीन परिस्थितियों में राष्ट्रपति को कुछ विशेष अधिकार देता है, लेकिन जजों ने यह सवाल उठाया कि क्या ट्रंप द्वारा घोषित स्थितियां वास्तव में ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ की परिभाषा में आती हैं।

IEEPA को लेकर ट्रंप प्रशासन का तर्क

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि राष्ट्रपति के पास इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है। यह कानून 1977 में बनाया गया था और इसके तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय लेनदेन और विदेशी संपत्तियों को नियंत्रित कर सकता है। IEEPA के जरिए प्रतिबंध लगाने, संपत्तियां फ्रीज करने और आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान है, बशर्ते वे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति से जुड़े खतरों को रोकने के लिए आवश्यक हों।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि IEEPA का मूल उद्देश्य व्यापक और स्थायी व्यापारिक शुल्क लगाना नहीं था, बल्कि असाधारण परिस्थितियों में सीमित और लक्षित आर्थिक कदम उठाना था। इसी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल ट्रंप की नीति, बल्कि भविष्य में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापारिक शक्तियों की सीमा तय कर सकता है।

फिलहाल अनिश्चितता बरकरार

फैसले के टलने से वैश्विक बाजारों और अमेरिकी व्यापार नीति पर अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अमेरिकी संवैधानिक ढांचे में कार्यपालिका की शक्तियों की व्याख्या के लिहाज से ऐतिहासिक हो सकता है।