9वीं में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला-बच्चों पर क्यों बढ़ा रहे हैं बोझ?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर सुनवाई के दौरान कहा कि नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू करना छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा की पढ़ाई पांचवीं या छठी कक्षा से शुरू की जानी चाहिए। यह मामला तमिलनाडु सरकार की याचिका से जुड़ा है, जिसमें जवाहर नवोदय विद्यालयों में लागू भाषा नीति का विरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
नई दिल्ली। सीबीएसई की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू करना छात्रों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि नौवीं की पढ़ाई पहले से ही चुनौतीपूर्ण होती है और ऐसे में एक नई भाषा जोड़ने से बच्चों का मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को सुझाव देते हुए कहा कि तीसरी भाषा की पढ़ाई पांचवीं या छठी कक्षा से शुरू की जानी चाहिए, ताकि छात्र धीरे-धीरे उसे सीख सकें और आगे चलकर उस पर अतिरिक्त दबाव महसूस न करें।
कोर्ट ने पूछा- 9वीं में नई भाषा जोड़ने की क्या जरूरत?
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नौवीं और दसवीं कक्षा छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। बोर्ड परीक्षाओं का दबाव आठवीं कक्षा से ही शुरू हो जाता है। ऐसे में नौवीं में एक नई भाषा को शामिल करना बच्चों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि तीसरी भाषा को छठी कक्षा में शुरू किया जाना चाहिए और नौवीं तक इसे समाप्त कर देना चाहिए। नौवीं की पढ़ाई पहले से ही कठिन है, ऐसे में अतिरिक्त भाषा की जरूरत क्यों है?
अपने स्कूल के दिनों का भी किया जिक्र
जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके समय में भी आठवीं कक्षा के छात्रों को दसवीं स्तर की पढ़ाई कराई जाती थी। उन्होंने कहा कि यदि उस समय छात्रों पर इतना दबाव था, तो आज के बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कितना अधिक होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
तमिलनाडु सरकार की याचिका पर हो रही है सुनवाई
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से जवाहर नवोदय विद्यालयों में लागू थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का विरोध करती रही है। राज्य सरकार का कहना है कि यह नीति राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और दो-भाषा मॉडल के अनुरूप नहीं है।
मंगलवार को रोक लगाने से कर दिया था इनकार
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि किसी भी भाषा का ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता और नई भाषाएं सीखना छात्रों के लिए लाभदायक हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या अंग्रेजी को भारत की मूल भाषा माना जा सकता है और इस नीति को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर केंद्र सरकार और सीबीएसई से जवाब मांगा है।
2026-27 सत्र से लागू हुई नई नीति
सीबीएसई ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी लागू की है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा भी पढ़नी होगी। नई व्यवस्था के कारण कई छात्रों को उन भाषाओं को छोड़ना पड़ सकता है, जिन्हें वे पांचवीं कक्षा से लगातार पढ़ते आ रहे हैं। इसी वजह से छात्रों, अभिभावकों और कई राज्यों में इस नीति को लेकर बहस छिड़ गई है।
याचिकाकर्ताओं ने उठाए कई सवाल
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सीबीएसई ने बिना पर्याप्त तैयारी और संसाधनों के इस नीति को लागू कर दिया है। उनका कहना है कि देश के कई स्कूलों में न तो पर्याप्त भाषा शिक्षक उपलब्ध हैं और न ही नई किताबें और जरूरी शैक्षणिक ढांचा तैयार है। याचिका में कहा गया है कि जल्दबाजी में लागू की गई इस नीति से छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार और सीबीएसई को अदालत के सामने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया पेश करनी होगी।