Tag: journalist brij khandelwal

जिम्मेदारी और हार्ड वर्क है पत्रकारिता  

कड़वी सच्चाई यह है कि ज्यादातर पत्रकारों के लिए न तो कोई ग्लैमर है और न ही कोई म...

घट गए इंसा बढ़ गए साए  

दिले नादां तुझे हुआ क्या है, ? इस प्रश्न का उत्तर मिले या न मिले, लेकिन ये तो पू...

कांग्रेस पार्टी खत्म होने के कगार पर

एक अंग्रेज द्वारा 28 दिसंबर 1985 में स्थापित की गई कांग्रेस पार्टी ने 139 साल का...

सॉलिड तर्क हैं, योगी जी, मुफ्त करो महिलाओं के लिए बस या...

उत्तर प्रदेश में महिला समूहो की ओर से यह मांग उठ रही है कि कर्नाटक की तरह यूपी म...

आजादी खतरे में, लोकतांत्रिक व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे...

बांग्लादेश की घटनाओं के बाद हमें सावधान हो जाना चाहिए। कम्युनिस्ट तो सिस्टम को न...

सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण को बुनियादी मानवाधिकार के र...

दस दिसंबर को मानवाधिकार दिवस है। मानवाधिकारों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होंगी। क्य...