तमन्ना भाटिया बोलीं,  साउथ में हीरोइनों को घूरते रहते हैं लोग,  दक्षिण में पितृसत्तात्मक माहौल

तमन्‍ना भाट‍िया ने बॉलीवुड से ज्यादा साउथ सिनेमा में काम क‍िया है। तम‍िल और तेलुगू स‍िनेमा में 'म‍िल्‍की ब्‍यूटी' के नाम से मशहूर एक्‍ट्रेस ने खुलासा क‍िया है कि साउथ इंडस्‍ट्री में मह‍िला एक्‍टर्स को लेकर एक खास तरह की 'नजर' होती है, यह प‍ितृसत्तात्‍मक वाइब जैसा है। वह कहती हैं, 'मैंने इसका अनुभव किया है।'

Jun 23, 2026 - 22:52
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तमन्ना भाटिया बोलीं,  साउथ में हीरोइनों को घूरते रहते हैं लोग,  दक्षिण में पितृसत्तात्मक माहौल

मुंबई। मुंबई में पैदा हुईं तमन्ना भाटिया उन चुनिंदा एक्‍ट्रेस में से हैं, ज‍िन्‍होंने बॉलीवुड से पहले साउथ सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। बीते 20 में 89 से ज्यादा तमिल, तेलुगू और हिंदी फिल्‍में कर चुकीं तमन्‍ना ने अब हाल ही एक इंटरव्यू में चौंकाने वाले दावे किए हैं। 'पेद्दी' में जान्‍हवी कपूर के क्‍लोजअप सीन्‍स पर मचे शोर के बीच 36 साल की तमन्ना ने साउथ सिनेमा में महिला एक्टर्स की उन परेशानियों का खुलासा किया है, जो हर दिन सेट पर झेलनी पड़ती है। एक्‍ट्रेस ने कहा कि वहां हर हीरोइन और फीमेल क्रू को 'लोग घूरते हैं' और यह कोई तारीफ की बात नहीं है।

तमन्ना भाटिया ने 'फोर्ब्‍स इंडिया' से ताजा बातचीत में अपने उन डांस नंबर्स के बारे में भी बात की, जिन्‍हें कथ‍ित 'सेक्‍सी आइटम सॉन्‍ग' कहा गया। एक्‍ट्रेस ने कहा कि वह उन्हें 'आइटम सॉन्ग' की बजाय 'पार्टी सॉन्ग' कहना ज्यादा पसंद करेंगी। उन्होंने लगे हाथ करीना कपूर और कटरीना कैफ का भी जिक्र किया, जिन्‍होंने 'छम्मक छल्लो' और 'शीला की जवानी' जैसे गाने किए। वह बॉलीवुड और साउथ इंडस्‍ट्री के बीच के अंतर पर भी बेबाकी से राय देती हैं।

तमन्ना ने इंटरव्‍यू में हिंदी और साउथ इंडियन इंडस्ट्री के बीच के अंतर पर दो टूक राय दी है। वह कहती हैं कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री अपने एक्टर्स को रास्ता चुनने का मौका देती है। जबकि साउथ में यह विकल्प हमेशा मौजूद नहीं होता। वह कहती हैं, 'हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दो तरह के एक्टर्स होते हैं। जो लोग चीजों को थोड़ा ज्यादा कलात्मक नजरिए से देखते हैं, वे कुछ खास तरह के किरदार निभाने में बेहतर होते हैं। हो सकता है कि वे ग्लैमरस गाने पर डांस न करें। लेकिन बॉलीवुड असल में आपको दोनों में से कोई एक चुनने का मौका देता है। जो लोग दोनों करते हैं, वे आखिरकार सुपरस्टार बन जाते हैं।'

'बाहुबली' में अवंतिका का किरदार निभाने वाली एक्‍ट्रेस ने आगे कहा कि साउथ सिनेमा हमेशा महिलाओं के लिए अच्छा नहीं होता। वह बोलीं, 'जब मैं साउथ इंडस्ट्री में आई, तो मुझे समझ आ गया कि लोग इसे कई नामों से क्यों बुलाते हैं। जैसे कि यहां महिलाओं के लिए एक खास तरह की 'नजर' है। यह घूरने जैसा है। यहां एक पितृसत्तात्मक वाइब है। ऐसी 'नजर' जो बहुत अच्छा नहीं है। मुझे लगता कि मैंने इसके म्यूजिकल पहलू को समझ लिया है।'

राम चरण की 'पेद्दी' पर मचे शोर के बीच तमन्‍ना ने आगे कहा, 'साउथ में ऐसा करने के लिए स्टार क्वालिटी की जरूरत होती है, इसलिए मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि उस मामले में वहां का सिनेमा उतना ही या उससे भी ज्यादा पाबंदियों वाला है। मैं तब की बात कर रही हूं जब आप कमर्शियल नजरिए से सफल होना चाहते हैं। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। मुझे यकीन है कि अलग-अलग लोगों के लिए यह अलग हो सकता है, लेकिन मैं उन महिला कलाकारों की बात कर रही हूं जिनका करियर लंबा रहा है, जैसे 10-15 साल का। वे परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड किरदारों में भी फिट हो पाई हैं और साथ ही कमर्शियल गाने और डांस भी कर पाई हैं।'

इसी साल 'ओ रोम‍ियो' में स्‍पेशल कैम‍ियो में नजर आईं तमन्ना कहती हैं, 'जब मैं करीना या कटरीना को किसी फ‍िल्म में गाने करते हुए देखती हूं... हो सकता है कि आपको वे फ‍िल्में याद न हों, लेकिन 'छम्मक छल्लो', 'शीला की जवानी' या 'कमली' जैसे गाने आपको हमेशा याद रहेंगे। आपको इन शानदार महिलाओं द्वारा किए गए गाने याद रहते हैं। वे किसी देवी जैसी लगती हैं, उनका अंदाज देवी जैसा होता है। वे खूबसूरती की मिसाल हैं। ग्रेसफुल हैं और खुद को सेलिब्रेट करती हैं।'