तेजस्वी सूर्या ने बयां किया छात्रों का दर्द, 8वीं से शुरू होती है नीट की तैयारी, बच्चे मशीन बन जाते हैं
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि रट्टा आधारित शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है और छात्रों का भविष्य केवल तीन घंटे की परीक्षा से तय नहीं होना चाहिए।
नई दिल्ली। लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समस्या केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक भारी मानसिक दबाव में रहते हैं। कई छात्र आठवीं कक्षा से ही नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं और कोटा जैसे शहरों में दो-तीन साल तक केवल रट्टा लगाकर पढ़ाई करने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान न खेल, न दोस्ती और न ही सामान्य सामाजिक जीवन बचता है, जिससे छात्र मशीन की तरह जीवन जीने लगते हैं।
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में वर्षों की मेहनत का फैसला सिर्फ तीन घंटे की परीक्षा से हो जाता है, जो छात्रों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में उन्होंने देशभर के युवाओं से बातचीत की है और अधिकांश छात्रों की मांग है कि केवल एक परीक्षा के आधार पर भविष्य तय करने की व्यवस्था बदले। उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा को आसान बनाने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि प्रश्नों में मौलिकता, बहुविषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) शिक्षा और अधिक व्यावहारिक मूल्यांकन चाहते हैं। उनके मुताबिक, नई शिक्षा नीति (एनईपी) इन्हीं बदलावों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अपने भाषण के दौरान तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं कर सके, जबकि मोदी सरकार 34 साल बाद नई शिक्षा नीति लेकर आई। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से सवाल किया कि क्या उन्होंने नई शिक्षा नीति को पढ़ा भी है। सूर्या ने दावा किया कि एनईपी छात्रों को रट्टा आधारित शिक्षा से बाहर निकालकर नवाचार, कौशल और बहुआयामी सीखने की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।
बीजेपी सांसद ने कहा कि शिक्षा समाज में आगे बढ़ने का सबसे बड़ा माध्यम है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके पास संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मेहनती छात्रों के सपनों और विश्वास के साथ विश्वासघात है। उन्होंने याद दिलाया कि नीट पेपर लीक सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'पाप' बताया था और सरकार ने तत्काल एफआईआर, सीबीआई जांच, गिरफ्तारियां, री-नीट और समय पर परिणाम जैसे कई कदम उठाए। साथ ही परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए हाईपावर कमेटी का गठन और सुधारात्मक फैसले भी लिए गए।
अपने संबोधन के अंत में तेजस्वी सूर्या ने कहा कि देश का युवा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि ठोस समाधान चाहता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो दशकों में 200 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत कानून की जरूरत थी। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि 2010 में यूपीए सरकार ऐसा ही विधेयक लाने के बावजूद उसे पारित क्यों नहीं करा सकी। सूर्या ने कहा कि एंटी पेपर लीक विधेयक युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।