जिला पंचायतों का कार्यकाल 12 जुलाई को खत्म हो रहा, डीएम बनेंगे प्रशासक या बढ़ेगा बोर्ड का कार्यकाल, सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश की सभी जिला पंचायतों का कार्यकाल अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। 12 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्षों और निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए चुनाव होने तक जिला पंचायतों का संचालन किसके हाथ में रहेगा। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि सरकार जिला पंचायत बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाएगी या फिर जिलाधिकारियों (डीएम) को प्रशासक नियुक्त करेगी। शासन के संभावित फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, 11 और 12 जुलाई को सरकारी अवकाश होने के कारण 10 जुलाई को ही शासन स्तर से इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है। यदि उसी दिन आदेश जारी होता है, तो 13 जुलाई से आगे की प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट हो जाएगी।
प्रदेश में अभी तक जिला पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में नए निर्वाचित बोर्ड के गठन तक अंतरिम व्यवस्था करना सरकार के लिए आवश्यक हो गया है। चर्चा यह भी है कि यदि चुनाव में विलंब होता है तो विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिला पंचायत बोर्ड का कार्यकाल कुछ समय के लिए बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में शासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
दूसरी ओर, यदि कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाता है, तो जिला पंचायतों का प्रशासन जिलाधिकारियों को प्रशासक के रूप में सौंपे जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस विकल्प पर इसलिए भी विचार किया जा रहा है क्योंकि पूर्व में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में उच्च न्यायालय ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद शासन अब जिला पंचायतों के मामले में कानूनी पहलुओं का परीक्षण करते हुए निर्णय लेने की तैयारी में जुटा है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार जिला पंचायतों में निर्वाचित व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में फैसला ले सकती है, ताकि विकास कार्यों की निरंतरता प्रभावित न हो। हालांकि अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा।
इस बीच ब्रज प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पूरनलाल लोधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि सरकार जिला पंचायत अध्यक्षों को ही अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लेती है, तो यह ग्रामीण विकास की गति को बनाए रखने की दृष्टि से एक व्यावहारिक कदम होगा।
फिलहाल जिला पंचायत अध्यक्षों, निर्वाचित सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों की निगाहें शासन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार जिला पंचायत बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाती है या फिर प्रशासनिक व्यवस्था की कमान जिलाधिकारियों को सौंपती है।