नौफरी में चाय डिप्लोमैसी से बुझी न्याय की आग, पुलिसिया कहर बना किस्सा  

आगरा। नौफरी कांड... जिसमें 14 मई को महाराणा प्रताप जयंती पर लगे एक बोर्ड के चलते गांव में पुलिस ने जो कहर बरपाया था, वह अब चाय की प्याली में सिमट गया है। जिस न्याय की मांग को लेकर गांव में गूंज थी, वह अब पुलिस अफसर की कूटनीति के सामने थम गई। बड़े साहब ने पीड़ितों के पैरोकारों को ‘व्यक्तिगत संपर्क’ और ‘सम्मानजनक चाय-पान’ से इस तरह साधा कि मुद्दा हाशिये पर चला गया और समाधान सिर्फ एक चौकी इंचार्ज का तबादला बनकर रह गया।

May 19, 2025 - 21:35
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नौफरी में चाय डिप्लोमैसी से बुझी न्याय की आग, पुलिसिया कहर बना किस्सा   
नौफरी में फिर से लग गया वही बोर्ड, जिसके नाम पर पुलिस ने 14 को तांडव मचाया था।  

बोर्ड लगा, राणा आए और फिर पुलिसिया तांडव

नौफरी गांव के युवाओं ने सड़क किनारे महाराणा प्रताप का एक बोर्ड लगाया था। इस बोर्ड का उद्घाटन करने पहुंचे करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा। राणा पहले सिकरारा के कार्यक्रम में जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने वहां कार्यक्रम रोक दिया, तो वह नौफरी आ गए। बोर्ड का अनावरण हुआ, भाषण हुए। तभी पुलिस ने ओकेंद्र को पकड़ने की कोशिश की, पर वे भाग निकले।

इसके बाद पुलिस ने जो किया, वह इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन अफसोस कि वह अब सिर्फ व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स तक सिमट गया है। लाठीचार्ज, घरों में घुसकर तोड़फोड़, महिलाओं से अभद्रता, एक युवक से जंजीर की छीना-झपटी और 11 युवाओं की हिरासत में बेरहमी से पिटाई।

अफसरशाही की ‘नरमी’ में गुम हुआ जनक्रोध

पुलिसिया हिंसा के वीडियो वायरल हुए, सोशल मीडिया में शोर मचा, क्षत्रिय समाज में उबाल आया। लेकिन तभी पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चालाकी से मामला थाम लिया। जिन्होंने न्याय की लड़ाई शुरू की थी, उन्हें ही समझाने-बुझाने के लिए बुलाया गया। साहब ने नंबर सेव किया, मुस्कराए, चाय मंगवाई... और बातों ही बातों में गुस्सा पानी हो गया। पुलिस महकमे के तीन सजातीय इंसपेक्टरों ने भी अपनी भूमिका अदा की।

फायनल सेटिंग: चौकी इंचार्ज गया, बोर्ड फिर से आया

जिन पुलिसकर्मियों ने तोड़फोड़ और मारपीट की थी, उनकी कोई जांच या जवाबदेही नहीं तय हुई। सिर्फ एकता पुलिस चौकी के इंचार्ज को हटा दिया गया। बाकी सब जस का तस। और लास्ट में वही बोर्ड, जिसे पुलिस ने हटाया था, आज फिर से लग गया, जैसे कि अब सब कुछ सामान्य हो गया हो। गांव में फिर से लगाये गये बोर्ड का अनावरण भी हो गया है। इस मौके पर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन प्रदीप भाटी, वरिष्ठ नेता धनवीर सिंह तोमर, शैलू जादौन, हरेंद्र सिंह, मुनेंद्र जादौन, युवराज परिहार, गजेंद्र परमार, ललित रघुवंशी, सोमेंद्र जादौन समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 

जमीन पर शांति, लेकिन सवाल कायम

क्या सिर्फ चौकी प्रभारी को हटाना पर्याप्त है? क्या डंडे के इस्तेमाल पर कोई जिम्मेदार नहीं? क्या जनता की आवाज इतनी सस्ती है कि एक कप चाय से दबा दी जाए? इन सवालों के जवाब शायद अब अदालतें या इतिहास ही देंगे, क्योंकि नौफरी गांव तो “शांति” से जी रहा है चाय के नए प्यालों के साथ।

SP_Singh AURGURU Editor