आगरा के आलू अनुसंधान केंद्र में तैयार नया जैविक 'सुपर पोटैटो' एनीमिया जैसी बीमारियों से लड़ेगा
आगरा। आगरा के सींगना में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र न केवल क्षेत्रीय कृषि को नई दिशा देगा, बल्कि यहां तैयार होने वाली विशेष किस्म की आलू वैरायटी महिलाओं और बच्चों में एनीमिया जैसे रोगों से लड़ने में मददगार साबित होगी। इस केंद्र से साउथ एशिया में पोषण, तकनीक और निर्यात को लेकर क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
-सीआईपी पेरू के 22 सदस्यीय डेलिगेशन ने सींगना स्थित निर्माणाधीन केंद्र का किया निरीक्षण, किसानों को मिलेगा तकनीकी लाभ
बुधवार को सेंटर फॉर इंटरनेशनल पोटैटो (सीआईपी), पेरू के 22 सदस्यीय उच्चस्तरीय बोर्ड डेलिगेशन ने सींगना स्थित इस अनुसंधान केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया। सबसे पहले प्रतिनिधिमंडल ने ताजमहल का अवलोकन किया और फिर उद्यान विभाग के गेस्ट हाउस, शाहजहां गार्डन स्थित फूस बंगला का दौरा किया। इसके पश्चात सींगना प्रक्षेत्र पहुंचे, जहां स्थानीय किसानों, कोल्ड स्टोर संचालकों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।
तैयार होगा पोषणयुक्त आलू
डेलिगेशन की सदस्य हेलन हंबले (कनाडा) ने कहा कि अनुसंधान केंद्र में जर्मप्लाज्म मटेरियल को पेरू से लाकर स्थानीय जरूरतों के अनुसार संशोधित किया जाएगा। इससे न सिर्फ प्रसंस्करण योग्य वैरायटी, बल्कि लौह तत्व से भरपूर आलू तैयार होंगे, जो कुपोषण से लड़ने में कारगर होंगे।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग का प्रतीक बनेगा आगरा का यह केंद्र
सीआईपी के बोर्ड डायरेक्टर डॉ. सिमोन हैक (जर्मनी) ने इसे पेरू, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण एशिया के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग का मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश जैसे देशों को भी तकनीकी और व्यावसायिक लाभ मिलेगा। उन्होंने आगरा को आलू अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित होने की संभावना जताई।
चिली के विशेषज्ञ ह्यूगो कैंपोंस ने कहा कि यह केंद्र भारत को कृषि प्रधान से उद्योग प्रधान राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्र की स्थापना में नहीं रहा अब कोई अवरोध
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (उद्यान, रेशम एवं खाद्य प्रसंस्करण) बीएल मीणा ने बताया कि केंद्र से जुड़ी सभी तकनीकी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। सींगना स्थित 138 हेक्टेयर क्षेत्र में से 10 एकड़ में यह अनुसंधान केंद्र विकसित होगा, जिसका संचालन उद्यान विभाग के गेस्ट हाउस से शुरू किया जाएगा। साथ ही सीधे हाईवे से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस केंद्र में आलू बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात और प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मास्टर ट्रेनर्स को पेरू स्थित मुख्यालय में प्रशिक्षित किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर निदेशक उद्यान विजय बहादुर द्विवेदी, संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव वर्मा, डॉ. सर्वेश, डॉ. धर्मपाल यादव, उप सचिव विनय गुप्ता, उप निदेशक कौशल कुमार नीरज, सीनियर एडवाइजर साउथ एशिया (सीआईपी) रमन अबराल, डीएचओ अनीता सिंह, अनीश चतुर्वेदी, संजीव वर्मा, अधीक्षक रजनीश पांडेय सहित अन्य अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।