दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन आगरा के जैन मंदिरों में भक्ति और संस्कारों की गूंज

आगरा। जैन समाज के लिए सर्वोच्च पर्व दशलक्षण महापर्व में हर दिन नए-नए धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हो रहे हैं। शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में सुबह से देर रात तक चल रहे अनुष्ठान, अभिषेक, पूजन, विधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति की अनुभूति करा रही हैं।

Aug 30, 2025 - 21:43
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दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन आगरा के जैन मंदिरों में भक्ति और संस्कारों की गूंज
दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन गुदड़ी मंसूर खां जैन मंदिर में शनिवार को हुए धार्मिक अनुष्ठान की एक झलक।

गुदड़ी मंसूर खां जैन मंदिर में अभिषेक और शांतिधारा

गुदड़ी मंसूर खां स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रातः भगवान जिनेंद्र देव का मंगल अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई, जिसके बाद श्रावक-श्राविकाओं ने मिलकर पूजन किया। तीसरे दिन का विशेष लक्षण ‘उत्तम आर्जव धर्म’ रहा। पंडित रविंद्र जैन ने बताया कि आर्जव का अर्थ है—मन, वचन और कार्य की सरलता एवं निष्कपटता।

संध्या काल में सौरभ सागर महिला मंडल द्वारा रंगारंग फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें बच्चों ने भगवान महावीर, तीर्थंकरों, साधु-साध्वियों एवं देवी-देवताओं की वेशभूषा धारण कर मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी भाव-भंगिमा और आत्मविश्वास ने वातावरण को धर्ममय बना दिया। विजयी प्रतिभागियों को समिति पदाधिकारियों ने प्रशस्ति-पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

ताजगंज जैन मंदिर में भी अभिषेक और पूजन

ताजगंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महामंडल विधान का आयोजन निरंतर चल रहा है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में जुटकर जिनेंद्र भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक, पूजन और शांतिधारा कर रहे हैं। मंगल कलश से विधिवत शुरुआत के बाद पंडित आदर्श जैन शास्त्री ने दशलक्षण धर्मों का महत्व समझाते हुए कहा कि यह पर्व आत्मा को निर्मल करने, अहिंसा, सत्य, आर्जव और संयम जैसे गुणों को जीवन में उतारने का उत्तम माध्यम है।

सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे दशलक्षण धर्मों को जीवन में अपनाकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ेंगे। आयोजन में जैन समाज के प्रमुख पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor