भैया दूज पर बहन से टीका कराने वालों को नहीं रहता यमराज का भय, आज दोपहर में 86 मिनट है टीका का शुभ मुहूर्त
दीपोत्सव के अंतिम दिन आज भाई दूज का त्यौहार मनाया जा रहा है। यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता है। यभाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन भाई बहन के साथ-साथ यमुना स्नान करना तिलक लगवाना तथा बहन के घर भोजन करना अति फलदाई होता है। इस दिन बहन भाई को भोजन कराकर तथा टीका लगाकर गोला देती है एवं उसके दीर्घायु होने की मंगल कामना करती है।
भाई भोजन आदि के पश्चात बहनों को वस्त्र, आभूषण और धन आदि उपहार स्वरूप देते हैं। इसी दिन सूर्य तथा यमुना जी ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था। इसलिए हम इसे "यम द्वितीया " भी कहते हैं ।
कथा :-
सूर्य भगवान की पत्नी का नाम छाया था। उनकी दो संतानें थीं। पुत्र यमराज तथा कन्या यमुना थी। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं। वह उनसे बराबर निवेदन करती थीं कि उनके घर जाकर भोजन करें। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालते रहे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया का दिन आया तो फिर यमुना ने यमराज को अपने घर आने के लिए निमंत्रण देकर वचनबद्ध कर लिया।
बहन के घर आते समय यमराज ने नर्क में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। भाई को देखते ही यमुना ने हर्ष विभोर होकर भाई यमराज का स्वागत सत्कार किया तथा भोजन करवाया। इससे प्रसन्न हो यमराज ने वर मांगने को कहा। यमुना ने कहा - भैया मैं आपसे यह वरदान मांगना चाहती हूं कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर आकर भोजन करें तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को आदर सत्कार कर टीका करें, उन्हें तुम्हारा भय न रहे। यमराज तथास्तु कह यमुना को अमूल्य वस्त्र, आभूषण देकर यमपुरी चले गए । तभी से ऐसी मान्यता है कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान कर पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं, उन्हें यमराज का भय नहीं रहता।
टीका विधान
बहन भाई को पूरब या उत्तर मुख होकर लकड़ी के पट्टे पर बिठाए। एक चौक बनाकर खुद पूरब या उत्तर मुख बैठकर भाई के माथे पर रोली से तिलक करें और चावल लगाएं । भाई को मीठा खिलाएं। गरी का गोला दें और भाई की आरती उतारें और भगवान श्री कृष्ण जी से और यमराज जी से अपने भाई की दीर्घायु और स्वस्थ होने की प्रार्थना करें। इस दौरान काले, नीले रंग के वस्त्र न पहनें।
ये है टीका का शुभ मुहूर्त
समय :- दोपहर 1:24 मिनट से 2:46 मिनट तक अति शुभ समय है ।
यात्रा करने वाले लोग घर से पान खाकर निकलें। आपकी यात्रा शुभ एवं मंगलमय होगी।