पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गूंजी नन्ही दहाड़, 22 नए शावकों ने बढ़ाया बाघों का कुनबा, जंगल सफारी का रोमांच कई गुना बढ़ा

-आरके सिंह- पीलीभीत। उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता का गवाह बन रहा है। पिछले सात महीनों के दौरान रिजर्व के अलग-अलग जंगलों में 20 से 22 नए बाघ शावकों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इन नन्हे शावकों की बढ़ती संख्या न केवल बाघों के बेहतर प्रजनन और सुरक्षित आवास का संकेत है, बल्कि जंगल सफारी पर आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गई है। वन विभाग का कहना है कि शावकों की आधिकारिक गणना नहीं की जाती, लेकिन वनकर्मियों और सफारी गाइडों द्वारा लगातार उनकी मौजूदगी दर्ज की जा रही है।

Jul 2, 2026 - 18:15
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गूंजी नन्ही दहाड़, 22 नए शावकों ने बढ़ाया बाघों का कुनबा, जंगल सफारी का रोमांच कई गुना बढ़ा
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कैमरे में कैद शावक।

सात महीनों में कई रेंजों में दिखे 22 नए शावक

पर्यटन सत्र 1 नवंबर 2025 से 30 जून 2026 के दौरान पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ, बराही, चूका, माला, दियोरिया और हरीपुर रेंज में कई बाघिनें अपने शावकों के साथ देखी गईं। वन विभाग के अनुसार इन सभी क्षेत्रों में कुल 20 से 22 शावकों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं, जिससे स्पष्ट है कि रिजर्व में बाघों का प्राकृतिक प्रजनन लगातार बेहतर हो रहा है।

'नैना' समेत कई बाघिनें शावकों के साथ आईं नजर

महोफ रेंज की चर्चित बाघिन 'नैना' अपने तीन शावकों के साथ कई बार दिखाई दी। इसी तरह बराही रेंज की एक अन्य बाघिन भी तीन शावकों के साथ देखी गई। चूका और भीमताल क्षेत्र में भी शावकों की अठखेलियों ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

पेड़ पर चढ़ते शावकों का वीडियो हुआ वायरल

चूका पिकनिक स्पॉट के पास दो शावकों को पेड़ पर चढ़ते हुए देखा गया। उनके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। पर्यटन सत्र के शुरुआती दिनों में एक शावक सफारी वाहन की ओर दौड़ पड़ा था, जिससे पर्यटकों में रोमांच के साथ हल्की दहशत भी फैल गई थी।

सुरक्षा के लिए बंद करनी पड़ी ट्री हट्स की बुकिंग

मई 2026 में चूका ट्री हट्स के नीचे दो शावकों के पहुंच जाने के बाद वन विभाग ने एहतियातन कुछ दिनों के लिए ट्री हट्स की बुकिंग बंद कर दी थी। विभाग का मानना था कि शावकों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

वनकर्मियों और गाइडों की निगरानी में दर्ज हुई मौजूदगी

बरेली के मुख्य वन संरक्षक पी. पी. सिंह ने बताया कि शावकों की आधिकारिक गणना नहीं की जाती। जंगल में नियमित गश्त करने वाले वनकर्मी और सफारी गाइड लगातार शावकों को देख रहे हैं और उनकी सूचना विभाग को दे रहे हैं।

सफारी गाइडों के अनुसार बराही और महोफ रेंज में 11 तथा माला, दियोरिया और हरीपुर रेंज में भी 11 शावकों के प्रमाण मिले हैं। इन सभी शावकों की उम्र एक वर्ष से कम बताई जा रही है।

ढाई वर्ष बाद बनते हैं स्वतंत्र बाघ

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघ के शावक लगभग ढाई वर्ष की आयु तक अपनी मां के साथ रहते हैं। इसके बाद वे स्वतंत्र होकर अपना क्षेत्र स्थापित करते हैं। इस अवधि तक उन्हें अन्य बाघों, जंगली जानवरों और प्राकृतिक खतरों से सुरक्षित रखना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होती है।

79 से अधिक वयस्क बाघ पहले ही दर्ज

पिछली बाघ गणना में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 79 से अधिक वयस्क बाघ दर्ज किए गए थे। हालांकि शावकों को आधिकारिक बाघ गणना में शामिल नहीं किया जाता। प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि वनकर्मियों और गाइडों द्वारा 20 से 22 शावकों के देखे जाने की जानकारी मिली है, जो रिजर्व में स्वस्थ प्रजनन व्यवस्था का सकारात्मक संकेत है।

वन्यजीव संरक्षण मॉडल की बड़ी सफलता

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या यह दर्शाती है कि यहां का संरक्षण मॉडल प्रभावी साबित हो रहा है। बेहतर आवास, पर्याप्त शिकार, मजबूत निगरानी व्यवस्था और वन विभाग के संरक्षण प्रयासों का परिणाम अब नए शावकों के रूप में दिखाई दे रहा है। इससे न केवल प्रदेश की जैव विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि वन्यजीव पर्यटन को भी नई पहचान और गति मिलने की उम्मीद है।

SP_Singh AURGURU Editor