बरेलीः टीईटी परीक्षा में फर्जीवाड़े का खुलासा: बायोमैट्रिक जांच में पकड़ा गया 'दो नाम-दो जन्मतिथि' वाला परीक्षार्थी, जेल भेजा गया
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी-2026) के दौरान बरेली में हाईटेक फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। परीक्षा केंद्र पर बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान एक अभ्यर्थी की पहचान संदिग्ध मिलने पर जांच की गई तो पता चला कि वह दो अलग-अलग नामों और दो अलग-अलग जन्मतिथियों का इस्तेमाल कर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो रहा था। खुलासे के बाद परीक्षा केंद्र प्रशासन की तहरीर पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
यह मामला बरेली के साहू गोपीनाथ कॉलेज परीक्षा केंद्र का है, जहां टीईटी-2026 की दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान बायोमैट्रिक सत्यापन में अभ्यर्थी के दस्तावेजों में गंभीर विसंगति सामने आई। सत्यापन के दौरान परीक्षा रिकॉर्ड और आधार कार्ड में दर्ज नाम एवं जन्मतिथि अलग-अलग पाए गए, जिसके बाद अधिकारियों ने उससे पूछताछ की।
क्षेत्राधिकारी प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर आरोपी के विरुद्ध कोतवाली थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपी को शनिवार को जेल भेज दिया गया।
अपर जिलाधिकारी (नगर) अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षा अभिलेखों में अभ्यर्थी का नाम मनोज कुमार तथा जन्मतिथि वर्ष 1986 दर्ज थी, जबकि बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान प्रस्तुत आधार कार्ड पर नाम आदेश कुमार और जन्मतिथि 1996 अंकित मिली। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसका वास्तविक नाम मनोज कुमार है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आयु सीमा पार होने के बाद आरोपी ने कथित रूप से आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदलवाकर प्रतियोगी परीक्षाओं में दोबारा पात्रता हासिल करने की कोशिश की। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी मूल रूप से फर्रुखाबाद का रहने वाला है। अधिकारियों के अनुसार उसने मनोज कुमार के नाम से बीएड की डिग्री प्राप्त की, जबकि आदेश कुमार के नाम से अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के संकेत मिले हैं।
प्रशासन को आशंका है कि यह फर्जीवाड़ा केवल टीईटी परीक्षा तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस अब आधार कार्ड में किए गए बदलाव, शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों और पूर्व में दी गई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। यह जांच की जा रही है कि कहीं आरोपी ने फर्जी पहचान के आधार पर अन्य सरकारी भर्तियों या प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हिस्सा तो नहीं लिया।
एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।