राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड पर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर, अनिल मोहन को अंतरिम महामंत्री का दायित्व सौंपा गया, ट्रस्ट बोला- भक्तों द्वारा दान की गई 2800 मूल्यवान वस्तुएं सुरक्षित, गोविंद गिरि महाराज ने कहा- कुछ लोगों का श्रीराम के प्रति अचानक उमड़ा प्रेम फूट डालने की साजिश, दोषियों को मिले कड़ी सजा
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले के बीच बड़ा फैसला लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। ट्रस्ट की विशेष बैठक में यह निर्णय लिया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि चोरी के सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि मंदिर की किसी भी बहुमूल्य वस्तु की चोरी नहीं हुई है और सभी 2800 मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
ट्रस्ट की बहुप्रतीक्षित बैठक पहले मणिराम छावनी में प्रस्तावित थी, लेकिन अंतिम समय में इसका स्थान बदलकर राम मंदिर परिसर कर दिया गया। बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, परमानंद जी महाराज, अयोध्या के जिलाधिकारी, निर्मोही अखाड़े के संत दिनेश जी महाराज, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि महाराज, कृष्ण मोहन सहित ज्यादातर सदस्य उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ सदस्य के. पाराशरन ऑनलाइन जुड़े।
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि महाराज ने पत्रकारों को बताया कि 11 जुलाई को प्रस्तावित बैठक 6 जुलाई को ही आयोजित कर ली गई। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण करोड़ों रामभक्तों के अनगिनत बलिदानों का परिणाम है, ऐसे में चढ़ावे में चोरी की घटना अत्यंत शर्मनाक और पीड़ादायक है। इस घटना से ट्रस्ट के सभी सदस्य आहत हैं।
गोविंद गिरि महाराज ने बताया कि महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने त्यागपत्र सौंप दिए थे। ट्रस्ट के संविधान के अनुसार त्यागपत्र सौंपते ही उसे स्वीकृत माना जाता है, इसलिए दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक चंपत राय की सेवाएं अविस्मरणीय हैं और ट्रस्ट उनके योगदान का सम्मान करता है।
ट्रस्ट ने अगली व्यवस्था तक कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। वे अपने सहयोगियों के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे।
कोषाध्यक्ष ने चढ़ावा चोरी मामले को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ माध्यमों में यह प्रचार किया जा रहा है कि मंदिर से सोने के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भी चोरी हुई हैं, जबकि यह पूरी तरह गलत है। ट्रस्ट के पास सभी वस्तुओं का विधिवत रजिस्टर मौजूद है और सोने की रामायण, कागभुसुंडी की मूर्ति, चरण पादुकाएं सहित करीब 2800 बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि एक प्रतिशत भी गड़बड़ी की संभावना नहीं रहे। इसके लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति पर भी विचार किया जा रहा है। इस संबंध में ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी।
गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि चोरी चाहे छोटी हो या बड़ी, अपराध तो अपराध है। सभी दोषियों और उनके सहयोगियों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मामले को लेकर अनावश्यक राजनीतिक माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, वही पहले कारसेवकों पर गोलियां चलवा चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे लोगों का अचानक उमड़ा श्रीराम के प्रति प्रेम असाधारण है। इनका उद्देश्य रामभक्तों में फूट डालना है, लेकिन संत समाज ऐसा नहीं होने देगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर विश्वास न करने और किसी भी शंका की स्थिति में ट्रस्ट कार्यालय आकर स्वयं व्यवस्थाएं देखने की अपील की।
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने से पहले मंदिर की व्यवस्थाएं देखने वाले गोपाल राव भी बैठक में पहुंचे, लेकिन ट्रस्ट के सदस्य नहीं होने के कारण उन्हें बैठक स्थल से बाहर जाने के लिए कह दिया गया।
ट्रस्ट की बैठक से पहले अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि भगवान के चढ़ावे में चोरी करने वालों ने अक्षम्य पाप किया है। उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोषियों को कठोर सजा दिलाएंगे।
संत वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी की घटना से करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।