छह दिवसीय विदेश दौरे पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जा रहे पीएम मोदी, हिंद-प्रशांत में रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई धार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रहेंगे। छह दिनों के इस दौरे को भारत की विदेश नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय वार्ताएं होंगी। इसके साथ ही भारत अपने विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएगा।

Jul 4, 2026 - 18:33
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छह दिवसीय विदेश दौरे पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जा रहे पीएम मोदी, हिंद-प्रशांत में रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई धार

इंडोनेशिया से होगी दौरे की शुरुआत

दौरे का पहला चरण इंडोनेशिया में होगा, जहां प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के साथ-साथ व्यापार, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। प्रधानमंत्री जकार्ता के अलावा योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का भी दौरा करेंगे और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया में आर्थिक और सामरिक सहयोग पर रहेगा फोकस

इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां उनकी प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ शिखर वार्ता होगी। बैठक में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच निवेश एवं व्यापार के नए अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे।

चार दशक बाद न्यूज़ीलैंड की ऐतिहासिक यात्रा

दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूज़ीलैंड जाएंगे। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, कृषि, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, निवेश और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंधों को नई ऊंचाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

'एक्ट ईस्ट' नीति को मिलेगा नया विस्तार

यह विदेश दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय कूटनीतिक रणनीति को और अधिक मजबूती देने वाला माना जा रहा है। भारत क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, मुक्त एवं सुरक्षित नौवहन और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को इस यात्रा के माध्यम से और स्पष्ट करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों देशों के साथ मजबूत होते संबंध न केवल भारत की सामरिक स्थिति को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर भी खोलेंगे।

SP_Singh AURGURU Editor