एनसीपीआई को बुलाने पर सर्वदलीय बैठक में हंगामा, महुआ मोइत्रा ने उठाया मान्यता का सवाल; विपक्ष ने किया बहिष्कार
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में ही विपक्ष ने अपने आक्रामक तेवर दिखा दिए। बैठक की शुरुआत में ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने हाल ही में टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों के गुट की ओर से सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उनके इस विरोध को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला और विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। राजनीतिक हलकों में इसे मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच होने वाले टकराव का ट्रेलर माना जा रहा है।
बैठक में महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब एनसीपीआई में शामिल होने वाले सांसदों को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अलग संसदीय दल के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है, तब सरकार ने उसे सर्वदलीय बैठक में किस आधार पर आमंत्रित किया। उनका कहना था कि जब मान्यता का मामला अभी स्पीकर के समक्ष विचाराधीन है, तब किसी नए संसदीय समूह को आधिकारिक तौर पर बैठक में शामिल करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
महुआ मोइत्रा की आपत्ति का कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया। विपक्ष का तर्क था कि जब तक लोकसभा अध्यक्ष अंतिम निर्णय नहीं ले लेते, तब तक एनसीपीआई को अलग राजनीतिक दल या संसदीय समूह के रूप में मान्यता देकर सर्वदलीय बैठक में बुलाना उचित नहीं है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलकर अपना विरोध दर्ज कराया।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के सुचारु संचालन और विधायी कार्यों पर चर्चा के लिए सभी संबंधित संसदीय समूहों से संवाद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एनसीपीआई के प्रतिनिधियों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया। सरकार का कहना है कि मान्यता का अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष को करना है और उसे लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं रखा गया है।
गौरतलब है कि टीएमसी के 20 बागी सांसद हाल ही में एनसीपीआई में शामिल हुए हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। हालांकि उन्हें सदन में अलग बैठने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन पार्टी को औपचारिक संसदीय मान्यता देने का निर्णय अभी लंबित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सर्वदलीय बैठक में जिस तरह विपक्ष ने शुरुआत से ही सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि मानसून सत्र के दौरान सरकार को कई मुद्दों पर विपक्ष के तीखे विरोध का सामना करना पड़ सकता है। विपक्षी दल पहले ही कई राजनीतिक और संसदीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसे में सर्वदलीय बैठक में हुआ यह टकराव आगामी मानसून सत्र का ट्रेलर माना जा रहा है, जबकि असली मुकाबला संसद के भीतर देखने को मिल सकता है।