उम्रकैद के फैसले के बाद दीवानी परिसर में बवाल, भाजयुमो नेता को गोली मरवाने की धमकी, मुकदमा दर्ज

दीवानी न्यायालय परिसर में वादी को धमकी देने और गाली-गलौज करने का मामला दर्ज हुआ। मामला वर्ष 2022 के जानलेवा हमले से जुड़े मुकदमे के फैसले के बाद का बताया गया है। अदालत ने एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि शाहिद बेग को बरी कर दिया था। आरोप है कि बरी होने के बाद शाहिद बेग और उसके साथियों ने वादी शैलू शर्मा को धमकाया। न्यू आगरा थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच एसआई योगेंद्र कुमार को सौंप दी है।

Jun 11, 2026 - 01:45
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उम्रकैद के फैसले के बाद दीवानी परिसर में बवाल, भाजयुमो नेता को गोली मरवाने की धमकी, मुकदमा दर्ज
भाजयुमो नेता शैलू पंडित।

आगरा। आगरा के दीवानी न्यायालय परिसर में एक मुकदमे के फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया।  वर्ष 2022 के जानलेवा हमले के मामले में अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद वादी पक्ष को कथित रूप से धमकी देने और गाली-गलौज करने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर न्यू आगरा थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में हुए जानलेवा हमले के एक चर्चित मामले में हाल ही में अदालत ने अपना निर्णय सुनाया था। फैसले में एक आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि सह-आरोपी शाहिद बेग को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

आरोप है कि अदालत से बरी होने के बाद शाहिद बेग अपने कुछ समर्थकों और साथियों के साथ दीवानी न्यायालय परिसर में मौजूद था। इसी दौरान उसकी मुलाकात वादी पक्ष से हुई, जहां कथित तौर पर कहासुनी शुरू हो गई। शिकायतकर्ता भाजयुमो नेता शैलू शर्मा का आरोप है कि उन्हें न केवल अपशब्द कहे गए, बल्कि भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने और गोली मरवाने तक की धमकी दी गई।

शैलू पंडित का कहना है कि इस घटना से वह और उसका परिवार भयभीत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की धमकी देना कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर विषय है। शिकायत मिलने के बाद न्यू आगरा थाना पुलिस ने शाहिद बेग समेत चार से पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

पुलिस अब न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की मदद से घटना की सच्चाई का पता लगाने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच उपनिरीक्षक योगेंद्र कुमार को सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्षता से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कथित घटना अदालत परिसर में हुई है, जहां सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।