मुख्यमंत्री के दौरे के मद्देनजर किसान नेताओं को उन्हीं के घर में किया गया नजरबंद, इनर रिंग रोड मुआवजा और कोऑपरेटिव बैंक गड़बड़ियों को लेकर सीएम से मिलने का किया था ऐलान

आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आज आगरा पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने किसान नेता श्याम सिंह चाहर समेत कई अन्य किसान नेताओं को पुलिस ने उनके घर में ही नजरबंद कर दिया। किसान नेताओं का कहना है कि प्रशासन को आशंका थी कि मुख्यमंत्री के समक्ष किसानों की लंबित समस्याएं उठाई जाएंगी। वहीं किसानों ने इनर रिंग रोड भूमि अधिग्रहण, आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की कार्यप्रणाली तथा आगरा कोऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। जिन अन्य नेताओं को नजरबंद किया गया है, उनमें मुकेश पाठक, लाखन सिंह त्यागी, सोमवीर यादव, गोपाल सिंह कुशवाह, पुष्पेंद्र चौधरी आदि शामिल हैं।

Jun 28, 2026 - 12:48
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मुख्यमंत्री  के दौरे के मद्देनजर किसान नेताओं को उन्हीं के घर में किया गया नजरबंद, इनर रिंग रोड मुआवजा और कोऑपरेटिव बैंक गड़बड़ियों को लेकर सीएम से मिलने का किया था ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के मद्देनजर पुलिस द्वारा घरों में नजरबंद किए गये किसान नेता।

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि थाना सदर बाजार पुलिस ने उन्हें और उनके साथी किसान नेताओं को उनके थाना क्षेत्र की पुलिस ने उन्हीं के घर में नजरबंद कर दिया, ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय फेस के भूमि अधिग्रहण का ज्ञापन न सौंपा जा सके। उनका कहना है कि किसानों की स्पष्ट मांग है कि या तो अधिग्रहित भूमि वापस की जाए अथवा वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार चार गुना मुआवजा दिया जाए। यदि अधिकारी यह कार्य नहीं कर सकते तो उन्हें अपने पद छोड़ देने चाहिए।

16 वर्ष से लंबित है भूमि अधिग्रहण का मामला

श्याम सिंह चाहर ने कहा कि इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय फेस के अंतर्गत रोहता, पंचगाई पट्टी, इटौरा और जाखोदा गांवों के किसान पिछले 16 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। न तो उन्हें उचित मुआवजा मिला और न ही भूमि वापस की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है।

उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 को लोकभवन में कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराई थी। उसी दौरान मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी आगरा और मंडलायुक्त को मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने से पहले मंडलायुक्त को सौंपा था ज्ञापन

किसानों ने बताया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की घोषणा से पहले मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप सिंह को भी ज्ञापन सौंपा गया था। किसान नेता सोमवीर यादव का कहना है कि प्रशासन द्वारा अब तक भौतिक सत्यापन के आदेश नहीं दिए गए और न ही निष्पक्ष जांच कराई गई। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट मांगी है, इसलिए सभी साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

भौतिक सत्यापन कराने की उठाई मांग

श्याम सिंह चाहर ने कहा कि इनर रिंग रोड एवं लैंड पार्सल तृतीय फेस का भौतिक सत्यापन कराया जाए। उन्होंने दावा किया कि अधिग्रहित क्षेत्र में हजारों प्लॉटधारक और मकान बनाकर रहने वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन एडीए अधिकारी इस वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे हैं और तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।

एडीए अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

किसान नेता लाखन सिंह त्यागी ने आरोप लगाया कि एडीए के कुछ अधिकारियों ने भू-माफिया जैसी भूमिका निभाई है। उन्होंने मांग की कि शासन ऐसे अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए। उनका कहना था कि किसान अब किसी भी कीमत पर अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ताज सिटी आलू उत्पादक समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने आरोप लगाया कि एडीए अधिकारी किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और पीछे हटने वाले नहीं हैं।

कोऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति पर भी उठाए सवाल

श्याम सिंह चाहर ने आगरा की कोऑपरेटिव बैंक मुख्य शाखा, नाई की मंडी की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बैंक पहले से लगभग आठ करोड़ रुपये के घाटे में थी। वर्ष 2024-25 में बैंक को लगभग एक करोड़ 70 लाख रुपये का लाभ हुआ, लेकिन वर्ष 2025-26 में बैंक फिर लगभग दस करोड़ रुपये के घाटे में पहुंच गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बैंक दोबारा भारी घाटे में चली गई।

उन्होंने किसानों से अपने शेयरों पर भी नजर रखने की अपील करते हुए कहा कि यदि बैंक की यही स्थिति रही तो किसानों की पूंजी भी प्रभावित हो सकती है।

बैठकों और खर्चों पर भी लगाए आरोप

श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव बैंक के तीन वर्षों में छह-छह बोर्ड बैठकें आयोजित हुईं, यानी कुल 18 बैठकें हुईं। इन बैठकों में चेयरमैन सहित 216 सदस्यों पर लगभग 49 लाख रुपये के खान-पान का खर्च दर्शाया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंक की मुख्य शाखा सहित 16 शाखाओं में तीन वर्षों के दौरान पेयजल पर लगभग 2.31 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया, जबकि संबंधित बिल और वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए।

इसके अलावा मुख्य शाखा सहित 16 शाखाओं में अतिथि सत्कार पर लगभग 2 करोड़ 68 लाख रुपये तथा छपाई एवं प्रचार-प्रसार पर लगभग 1 करोड़ 99 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। उनका आरोप है कि जांच रिपोर्ट में इन खर्चों के बिल और वाउचर नहीं दर्शाए गए तथा यह भी स्पष्ट नहीं है कि भुगतान नगद हुआ या चेक के माध्यम से। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अभी और भी खुलासे होंगे।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की कार्यशैली से उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

SP_Singh AURGURU Editor