विजिलेंस का भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा, एडीए के रिटायर्ड लिपिक और बरेली के पूर्व मुख्य अभियंता पर मुकदमा
आगरा विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में एडीए के सेवानिवृत्त लिपिक गिरीश चन्द्र और बरेली नगर निगम के पूर्व मुख्य अभियंता राजेश कुमार यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में गिरीश चन्द्र की 67.63 लाख रुपये की वैध आय के मुकाबले 86.61 लाख रुपये खर्च पाए गए, जबकि राजेश कुमार यादव की 1.93 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 3.91 करोड़ रुपये का व्यय सामने आया। शासन से अनुमति मिलने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
आगरा विजिलेंस थाने में दर्ज हुई एफआईआर, करोड़ों की आय-व्यय में भारी अंतर मिलने से मचा हड़कंप
आगरा। आगरा में विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो सरकारी कर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। इनमें आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के सेवानिवृत्त लिपिक गिरीश चन्द्र और बरेली नगर निगम के पूर्व मुख्य अभियंता राजेश कुमार यादव शामिल हैं। दोनों मामलों में जांच के दौरान आय और खर्च के बीच भारी अंतर सामने आया है। शासन से अभियोजन की अनुमति मिलने के बाद आगरा स्थित विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है।
एडीए के रिटायर्ड लिपिक पर दर्ज हुआ मुकदमा
विजिलेंस की जांच में सामने आया कि एडीए के सेवानिवृत्त लिपिक गिरीश चन्द्र ने अपनी ज्ञात और वैध आय से कहीं अधिक खर्च किया। जांच के मुताबिक, उनकी वैध आय 67.63 लाख रुपये आंकी गई, जबकि खर्च 86.61 लाख रुपये पाया गया। जांच के दौरान करीब 18.98 लाख रुपये का अनानुपातिक व्यय सामने आया। इस संबंध में वर्ष 2024 में खुली जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद शासन से अभियोजन की अनुमति प्राप्त की गई और 8 जुलाई को आगरा विजिलेंस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
विजिलेंस अब गिरीश चन्द्र की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और आय के अन्य स्रोतों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
पूर्व मुख्य अभियंता राजेश कुमार यादव पर भी कसा शिकंजा
दूसरी बड़ी कार्रवाई बरेली नगर निगम के पूर्व मुख्य अभियंता राजेश कुमार यादव के खिलाफ हुई है। विजिलेंस जांच में उनकी वैध आय और खर्च के बीच चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, राजेश कुमार यादव की वैध आय करीब 1.93 करोड़ रुपये पाई गई, जबकि उनके और परिवार के खर्च का आंकड़ा 3.91 करोड़ रुपये से अधिक निकला। इस तरह करीब 1.97 करोड़ रुपये से ज्यादा का अनानुपातिक व्यय सामने आया है।
पूछताछ के दौरान आरोपी अधिकारी इस भारी अंतर को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ भी आगरा विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की होगी जांच
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मामलों में सिर्फ आय और खर्च के आंकड़ों की ही नहीं, बल्कि संभावित बेनामी संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विजिलेंस टीम दस्तावेजों और साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है।
विभागों में मचा हड़कंप
दो अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद सरकारी महकमों में हलचल तेज हो गई है। विजिलेंस की इस सख्ती को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में ऐसे अन्य मामलों की भी समीक्षा की जा सकती है, जिनमें आय और संपत्ति को लेकर शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं।