भाजपा पार्षद के वायरल पत्र ने मचाई हलचल, सराय ख्वाजा चौकी इंचार्ज के खिलाफ खोला मोर्चा
भाजपा पार्षद अजय गोस्वामी द्वारा पुलिस कमिश्नर आगरा को लिखा गया एक शिकायत पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पत्र में सराय ख्वाजा चौकी इंचार्ज पर चरस, गांजा, जुआ और सट्टे के कथित कारोबारियों से नियमित वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पार्षद ने गोपनीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस पर चरस-गांजा, जुआ और सट्टे से मासिक वसूली के आरोप, पुलिस कमिश्नर से गोपनीय जांच की मांग
आगरा। आगरा में थाना शाहगंज क्षेत्र की सराय ख्वाजा चौकी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। भाजपा पार्षद अजय गोस्वामी द्वारा पुलिस कमिश्नर आगरा दीपक कुमार को लिखा गया एक शिकायत पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पत्र में चौकी इंचार्ज सराय ख्वाजा पर क्षेत्र में संचालित कथित अवैध कारोबारों से वसूली करने और शिकायतों पर कार्रवाई न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पार्षद अजय गोस्वामी ने अपने पत्र में दावा किया है कि सराय ख्वाजा चौकी क्षेत्र में चरस, गांजा, जुआ और सट्टे का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों से नियमित रूप से प्रतिमाह और प्रतिदिन के आधार पर कथित वसूली की जाती है।
वायरल पत्र में कथित तौर पर कुछ व्यक्तियों के नाम और उनसे ली जाने वाली रकम का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, हबीब मोटा नामक व्यक्ति से जुए के कारोबार के एवज में प्रतिदिन पांच हजार रुपये लिए जाने का आरोप है। वहीं सद्दाम उर्फ बिहारी से बीस हजार रुपये प्रतिमाह, राजू से चरस-गांजा कारोबार के नाम पर साठ हजार रुपये प्रतिमाह, हबीब से गांजा कारोबार के एवज में एक लाख बीस हजार रुपये प्रतिमाह तथा खलील से चालीस हजार रुपये प्रतिमाह लिए जाने का दावा किया गया है।
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद चौकी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से पूरे मामले की गोपनीय जांच कराए जाने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। यदि पुलिस कमिश्नर स्तर पर मामले की जांच कराई जाती है तो सराय ख्वाजा क्षेत्र में संचालित कथित अवैध कारोबारों और उनसे जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल वायरल पत्र ने क्षेत्रीय राजनीति और पुलिस व्यवस्था दोनों में हलचल पैदा कर दी है।