युगदृष्टा पंडित नेहरू: आधुनिक भारत के शिल्पी को जयंती पर शत-शत नमन
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के ही नहीं, विश्व के महान नेताओं में शुमार किए जाते हैं और आदर के साथ याद किए जाते हैं। पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में ‘आनंद भवन’ जैसे आलीशान घर में हुआ था। देश के अपने समय के प्रख्यात बैरिस्टर और दुनिया की जानी-मानी हस्ती पंडित मोतीलाल नेहरू एवं मां श्रीमती स्वरूप रानी की इकलौती संतान पंडित जवाहरलाल नेहरू वास्तव में एक युगदृष्टा थे।
पंडित नेहरू ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, लंदन से बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की थी। उन्हें गुलाब के फूल से बड़ा लगाव था। बताया जाता है कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, लंदन में पढ़ाई के दौरान नेहरू जी को अपनी अचकन में गुलाब लगाने का शौक था। शौक पूरा करने के लिए वे यूनिवर्सिटी के बगीचे से गुलाब का एक फूल तोड़ लेते थे, जिस पर उन्हें उस समय 500 रुपये जुर्माना देना पड़ता था। पंडित नेहरू ने इस बारे में अपने पिता पंडित मोतीलाल नेहरू को पत्र लिखा और बताया कि उन्हें गुलाब पसंद है और इस शौक को पूरा करने के कारण 500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना देना पड़ता है। इस पर पंडित मोतीलाल नेहरू ने लिखा- बेटे, तुम अपना शौक पूरा करो, 500 रुपये हर रोज़ जमा कर दो, कोई चिंता मत करो।
कहा यह भी जाता है कि पंडित नेहरू के कपड़े पेरिस धुलने भेजे जाते थे। इतने संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता आंदोलन में 9 वर्ष 6 महीने तक जेल की यातनाएं सहीं। जब देश आज़ाद हुआ, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सबसे पहले उनका नाम प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया, जिसे पूरी कांग्रेस और देश ने समर्थन दिया। 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में पंडित नेहरू ने प्रधानमंत्री रहते हुए विज्ञान, उद्योग, लोकतंत्र, समरसता और गुटनिरपेक्षता की नीति को सुदृढ़ किया। विश्व के गरीब व छोटे देशों के हितों की रक्षा हेतु उन्होंने तत्कालीन विश्व नेताओं टीटो और नासिर के साथ मिलकर ‘निर्गुट आंदोलन’ तैयार किया और अमेरिका, रूस तथा चीन जैसे महाशक्तियों के सामने दबे-कुचले देशों की आवाज़ को बुलंद किया। रूस जैसे शक्तिशाली देश के साथ मित्रता की मिसाल भी पंडित नेहरू ने ही कायम की।
पंडित नेहरू 16 वर्ष 9 माह 12 दिन तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उन्हें छोटे-छोटे बच्चों से अत्यंत प्रेम था और इसी कारण वे ‘चाचा नेहरू’ के नाम से विश्व प्रसिद्ध हैं। उनका जन्मदिन प्रतिवर्ष ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
27 मई 1964 को हृदयघात से पंडित नेहरू का निधन हो गया। उनके निधन पर देश ही नहीं, विश्व भर में यह कहा गया कि अब ऐसा नेता शायद ही पैदा होगा। पंडित नेहरू ने ‘भारत एक खोज’, ‘भारत का इतिहास’ सहित कई महत्वपूर्ण रचनाएँ लिखीं। सामाजिक समरसता और एकता के लिए पंचशील सिद्धांत का प्रतिपादन भी उन्होंने ही किया।
पंडित नेहरू को हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, फ्रेंच एवं फ़ारसी सहित कई भाषाओं में महारत हासिल थी। उनकी आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक तथा विदेश नीति आज भी प्रासंगिक हैं। पंडित नेहरू ने जिस आधुनिक भारत की रचना की, आज हमारा देश उन्हीं के सिद्धांतों और आधारशिला पर मंज़िल दर मंज़िल आगे बढ़ रहा है।
लेकिन दुर्भाग्य है हम सबका कि हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पंडित नेहरू जैसे महान व्यक्तित्व को भारत के बंटवारे, कश्मीर समस्या और न जाने कितनी अन्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराकर झूठे आरोपों के माध्यम से बदनाम करने की कोशिश करते हैं और हम, आज़ाद भारत के नागरिक होने के नाते, ऐसे झूठे एवं अनर्गल आरोपों का मुंहतोड़ जवाब नहीं दे पा रहे।
आज पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। आइए संकल्प लें कि पंडित नेहरू ने जिस भारत की रचना की, जिन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, उनको मजबूत करने के लिए एकजुट हों और छोटी मानसिकता वाले लोगों को मुंहतोड़ जवाब दें।
-रमाशंकर शर्मा एडवोकेट,
वरिष्ठ अधिवक्ता, कांग्रेस नेता और राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
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