सूरसदन में गूंजा भारतीय संस्कृति का स्वर, 'संस्कृति संगम 2026' में लोककला, राष्ट्रभक्ति और प्रतिभाओं का अद्भुत संगम

आगरा। डेल्फिक एसोसिएशन द्वारा सूरसदन प्रेक्षागृह में आयोजित 'संस्कृति संगम 2026' भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, शास्त्रीय कलाओं और राष्ट्रभक्ति का भव्य उत्सव बन गया। कार्यक्रम में देश की सांस्कृतिक विविधता को नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। विशेष बात यह रही कि बस्तियों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देकर उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। वहीं 'कलयुग का श्रवण कुमार' नाटक ने माता-पिता के प्रति बदलते सामाजिक व्यवहार पर गहरा संदेश देते हुए दर्शकों को भावुक कर दिया।

Jul 19, 2026 - 22:04
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सूरसदन में गूंजा भारतीय संस्कृति का स्वर, 'संस्कृति संगम 2026' में लोककला, राष्ट्रभक्ति और प्रतिभाओं का अद्भुत संगम
सूरसदन प्रेक्षागृह में डेल्फिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित 'संस्कृति संगम 2026' में लोक एवं शास्त्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते प्रतिभागी।

कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजी उत्तर प्रदेश एवं संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर.के. स्वर्णकार, पीएसी कमांडेंट नरेंद्र कुमार सिंह, आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा, आयोजक अनीता सिसोदिया, सह-संयोजक राहुल वर्मा, मनीष गोयल एवं हर्ष गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

अपने संबोधन में डॉ. आर.के. स्वर्णकार ने कहा कि भारत विविधताओं में एकता का अद्भुत उदाहरण है। यहां की संस्कृति जन-जन के जीवन में रची-बसी है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें सही मंच और अवसर देने की है। डेल्फिक एसोसिएशन इसी उद्देश्य को लेकर लगातार कार्य कर रही है।

आयोजक अनीता सिसोदिया ने बताया कि संस्था बस्तियों में रहने वाले प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण एवं मंच उपलब्ध करा रही है, ताकि वे अपनी प्रतिभा के दम पर समाज में नई पहचान बना सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद 'देश रंगीला' की प्रस्तुति ने पूरे सभागार में उत्साह का माहौल बना दिया। श्रीकृष्ण रासलीला, कश्मीरी लोकनृत्य, कालबेलिया, पंजाबी, मराठी, भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी सहित विभिन्न लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का आकर्षक चित्र प्रस्तुत किया। समापन पर 'वंदे मातरम्' की प्रस्तुति ने पूरे सभागार को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।

सावन गीतों की मनमोहक प्रस्तुति के साथ राजपूताना शौर्य का प्रतीक तलवारबाजी का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं कथक युगल नृत्य ने अपनी सुंदर अभिव्यक्ति और लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

संगीत सत्र में आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा और डॉ. सरला शर्मा ने गिटार, सिंथेसाइजर और पियानो की मधुर संगत के साथ युगल गायन प्रस्तुत किया, जिस पर दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब योगेश परमार और उनकी टीम ने 'कलयुग का श्रवण कुमार' नाटक का मंचन किया। माता-पिता के प्रति बदलती सोच और पारिवारिक मूल्यों के क्षरण को दर्शाती इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया और आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का समापन हनुमान चालीसा की सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुआ। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, कला, संस्कार, लोक परंपराओं और राष्ट्रप्रेम का अनुपम संगम देखने को मिला।

SP_Singh AURGURU Editor