कोर्ट पहुंचते-पहुंचते 'सफेद हेरोइन' हुई काली, साक्ष्यों की कमजोरी से 450 ग्राम ड्रग्स केस में आरोपी बरी

आगरा की विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने 450 ग्राम हेरोइन बरामदगी के पांच साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत में पेश सीलबंद पैकेट में सफेद की जगह काले रंग का पदार्थ मिला, जबकि गवाहों ने उसे सफेद हेरोइन बताया था। साथ ही पुलिस द्वारा सैंपल 12 दिन बाद लैब भेजे जाने और जांच में अन्य खामियों के चलते अदालत ने साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना और आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

Jul 2, 2026 - 18:40
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कोर्ट पहुंचते-पहुंचते 'सफेद हेरोइन' हुई काली, साक्ष्यों की कमजोरी से 450 ग्राम ड्रग्स केस में आरोपी बरी

एनडीपीएस कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल, पांच साल पुराने मामले में संदेह का लाभ मिलने पर आरोपी को मिली राहत

आगरा। आगरा की विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने करीब पांच वर्ष पुराने 450 ग्राम हेरोइन बरामदगी मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश किए गए सीलबंद पैकेट को खोला गया तो उसमें मौजूद पदार्थ का रंग पुलिस और गवाहों के बयानों से अलग पाया गया। जिस पदार्थ को पुलिस और गवाहों ने सफेद रंग की हेरोइन बताया था, वह अदालत में काले रंग का दिखाई दिया। इस विरोधाभास ने अभियोजन पक्ष के दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

मामला सदर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 450 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया था। बरामदगी के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान जांच प्रक्रिया में कई खामियां सामने आईं।

अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि बरामद पदार्थ का नमूना (सैंपल) घटना के तुरंत बाद फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। पुलिस ने सैंपल को 12 दिन बाद प्रयोगशाला भेजा, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। एनडीपीएस मामलों में बरामद मादक पदार्थ की सुरक्षित कस्टडी और समय पर वैज्ञानिक जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसके अलावा अभियोजन पक्ष के गवाहों ने अपने बयानों में बरामद पदार्थ को सफेद रंग का बताया, जबकि अदालत में सीलबंद पैकेट खोलने पर उसमें काले रंग का पदार्थ मिला। इस महत्वपूर्ण अंतर को लेकर अदालत ने पुलिस की जांच और बरामदगी की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए।

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। साक्ष्यों में विरोधाभास, जांच में देरी और बरामद पदार्थ की स्थिति को लेकर उत्पन्न संदेह का लाभ आरोपी को दिया गया। इसी आधार पर विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

यह फैसला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों को कानूनी प्रक्रियाओं और साक्ष्यों की शृंखला (Chain of Custody) का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है। किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर सकती है और आरोपी को कानूनी राहत मिल सकती है।