भीषण गर्मी से शहर की ओर भाग रहे वन्यजीव: आश्रय की तलाश में सेंट पीटर्स कॉलेज, स्कूटी और पूर्व जिला जज के घर तक जा पहुंचे वन्यजीव, वाइल्डलाइफ एसओएस ने आगरा में एक ही दिन में तीन रेप्टाइल्स किए रेस्क्यू
भीषण गर्मी के कारण वन्यजीव शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। आगरा में वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने एक ही दिन में सेंट पीटर्स कॉलेज, एक स्कूटी और पूर्व जिला जज के आवास से एक इंडियन रैट स्नेक तथा दो बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ते तापमान के कारण सरीसृप छाया और सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, इसलिए लोगों को घबराने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
आगरा। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वन्यजीव भी इससे गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी से राहत और छाया की तलाश में जंगली जीव अब शहरों के रिहायशी इलाकों, शैक्षणिक संस्थानों और वाहनों तक पहुंचने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण आगरा में देखने को मिला, जहां वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों से एक इंडियन रैट स्नेक और दो बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड (गोह) का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। सभी वन्यजीव स्वस्थ पाए जाने पर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
दिन का पहला रेस्क्यू ऑपरेशन सेंट पीटर्स कॉलेज, आगरा में किया गया। कॉलेज परिसर में पानी की टंकी के पास एक इंडियन रैट स्नेक आराम करता हुआ दिखाई दिया। कॉलेज प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल वाइल्डलाइफ़ एसओएस की हेल्पलाइन (+91-9917109666) पर सूचना दी। सूचना मिलते ही रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक सांप को सुरक्षित बाहर निकाला। चिकित्सकीय निरीक्षण में उसके पूरी तरह स्वस्थ होने की पुष्टि के बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया।
इसी दिन दूसरा रेस्क्यू शहर की एक हाउसिंग कॉलोनी में हुआ। भीषण गर्मी से बचने के लिए एक बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड (गोह) पार्किंग में खड़ी एक स्कूटी के अंदर घुस गई थी। स्थानीय लोग घबरा गए और कोई भी मैकेनिक स्कूटी के पास जाने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे में वाइल्डलाइफ़ एसओएस की टीम ने अत्यंत सावधानी से स्कूटी के आवश्यक हिस्सों को खोलकर गोह को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच में वह पूरी तरह स्वस्थ पाई गई, जिसके बाद उसे भी प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।
तीसरा रेस्क्यू आगरा में ही एक पूर्व जिला न्यायाधीश के आवास से किया गया। वहां एक बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड परिसर की छायादार जगह में छिपी हुई थी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और बिना किसी नुकसान के उसे सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन रैट स्नेक और बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित प्रजातियां हैं, जिन्हें देश में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इंडियन रैट स्नेक विषहीन होता है और खेतों तथा शहरी क्षेत्रों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड को घटते जंगलों और अवैध वन्यजीव व्यापार से लगातार खतरा बना हुआ है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि तीनों मामलों में लोगों ने घबराने या जानवरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय पेशेवर सहायता लेकर जिम्मेदारी का परिचय दिया, जिससे इन वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू संभव हो सका।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के निदेशक बैजूराज एम.वी. ने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण सरीसृप ठंडी और छायादार जगहों की तलाश में वाहनों, भवनों, परिसरों और दीवारों के आसपास पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में लोगों का धैर्य और समझदारी भरा व्यवहार ही वन्यजीवों की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।