लेखिकाओं की आवाज़ में नारी शक्ति की हुंकार: काव्य गोष्ठी में विचारों ने हिलाई सोच
आगरा। उत्तर प्रदेश लेखिका मंच द्वारा रविवार, 19 अप्रैल को होटल ताज हाइट्स में आयोजित अप्रैल माह की मासिक संयुक्त बैठक एवं काव्य गोष्ठी में नारी शक्ति, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त संगम देखने को मिला। महिला दिवस, महिला सशक्तिकरण, नव संवत्सर और बैसाखी पर्व जैसे विविध विषयों पर लेखिकाओं ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं के माध्यम से समाज की सोच को झकझोरने का कार्य किया।
नारी के अस्तित्व और सम्मान पर गूंजे विचार
कार्यक्रम में संस्था की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती शिखा श्रीधर ने समाज में महिलाओं के स्थान और उनके महत्व को रेखांकित किया। प्रीति आनंद अस्थाना ने अपने मुक्तकों के जरिए भावनाओं की अभिव्यक्ति की, वहीं शशि मल्होत्रा ने स्त्री के जीवन चक्र को गहराई से प्रस्तुत किया।
बैसाखी, नव संवत्सर और संस्कृति पर हुई चर्चा
रजनी सिंह ने गुरु गोविंद सिंह के सिख परंपरा और बैसाखी पर्व के महत्व पर अपने विचार रखे। विनोद बोरा ने नव संवत्सर और बैसाखी के सांस्कृतिक महत्व को समझाया। रेनू राजवीर ने फसलों की कटाई और किसानों के घर आई खुशियों का जीवंत चित्रण किया।
वैश्विक चिंताओं से लेकर मातृत्व तक छुए कई पहलू
दीपा रावत ने वैश्विक परिस्थितियों में बदलते परिवेश और विश्व के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की। मीनाक्षी सिंह ने मां के स्नेह पर भावुक कविता प्रस्तुत की, जबकि गीता शर्मा ने महिलाओं की स्थिति पर प्रभावी रचना सुनाई।
धर्म, शक्ति और समानता के संदेश
ज्योति ने नवदुर्गा के महत्व की व्याख्या करते हुए आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। कुसुम लता ने सिख धर्म और बैसाखी पर अपनी रचना प्रस्तुत की। ममता गुप्ता ने महिला दिवस पर कविता पाठ किया।
समाज में समानता और नारी मन के भाव
करुणा सुजाता और मानसी ने लड़का-लड़की के भेदभाव पर करारा प्रहार करते हुए अपनी कविताएं सुनाईं। राजश्री यादव ने “नारी मन के सपने और एहसास” विषय पर गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
बैठक के अंत में संस्था की अध्यक्ष द्वारा सभी प्रतिभागियों और उपस्थित जनों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।