बरेली में वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश: चार ठग लखनऊ से गिरफ्तार

-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में साइबर ठगी की एक हाईटेक और चौंकाने वाली घटना का खुलासा हुआ है, जिसमें एक रिटायर्ड वैज्ञानिक को 'डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे 1.29 करोड़ रुपये की ठगी की गई। थाना साइबर क्राइम बरेली और एसटीएफ लखनऊ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सक्रिय साइबर अपराधियों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

Jul 5, 2025 - 18:43
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बरेली में वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश: चार ठग लखनऊ से गिरफ्तार
बरेली की साइबर क्राइम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये चार ठग, जिन्होंने एक वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की थी।  

ठगी का शिकार बने शुकदेव नंदी, जो कि आरवीआरआई कैंपस, इज्जतनगर बरेली निवासी एवं रिटायर्ड वैज्ञानिक हैं, ने 26 जून को थाना साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 17 जून से 20 जून के बीच उन्हें व्हाट्सएप और वीडियो कॉल कर खुद को बेंगलुरु पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताने वाले लोगों ने यह झांसा दिया कि उनके आधार कार्ड से फर्जी सिम निकाली गई है, जिसका उपयोग ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जॉब फ्रॉड में हुआ है।

ठगों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर शुकदेव नंदी को मानसिक रूप से डराया और धमकाया। फिर एक फर्जी ऑडिट प्रक्रिया के बहाने तीन अलग-अलग बैंक खातों में 1.29 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर करवा लिए।

गिरफ्तार चारों आरोपी ग्रेजुएट हैं। ये आरोपी हैं सुधीर कुमार चौरसिया, लाला बाग, लखनऊ (बीकॊम), रजनीश द्विवेदी, धपिया, गोंडा, श्याम कुमार वर्मा, खदरा, लखनऊ (बीए) महेन्द्र प्रताप सिंह, गोमती नगर, लखनऊ (बीएससी) इनके पास से 4 चेक बुक, छह एटीएम कार्ड और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

ठगी का तरीका बेहद संगठित और तकनीकी था

गिरोह के सदस्य अन्य लोगों के बैंक खाते कमीशन पर लेते थे, और ठगी की रकम को 125 से अधिक खातों में तोड़कर भेजते थे। अंत में पूरी रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अपने क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर देते थे।

अपर पुलिस अधीक्षक अपराध मनीष कुमार सोनकर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी एक अंतरराज्यीय साइबर गैंग का हिस्सा हैं, जिसके नेटवर्क दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में फैले हुए हैं।

यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट, फर्जी अधिकारी बनकर डराना, और मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर आर्थिक दोहन जैसे तरीकों का प्रयोग करता है, जो साइबर अपराध के नए और खतरनाक आयाम को दर्शाता है।

SP_Singh AURGURU Editor