16 साल पुराने मामले में आगरा के नालंदा बिल्डर्स के खिलाफ हुआ केस दर्ज, रकम लेकर प्लॊट नहीं दिया
दिल्ली निवासी रमा सारस्वत ने नालंदा बिल्डर्स पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2008 से 2024 के बीच प्लॉट दिलाने के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लिए, पर न तो जमीन दी और न ही रकम लौटाई। पीड़िता ने आखिरकार वर्षों की जद्दोजहद के बाद हरीपर्वत थाने में अमानत में खयानत की एफआईआर दर्ज कराई है।
आगरा। 16 वर्षों से चली आ रही कथित धोखाधड़ी की कहानी अब पुलिस की फाइलों में दर्ज हो चुकी है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर-12 निवासी 67 वर्षीय श्रीमती रमा सारस्वत ने बताया कि वे और उनका परिवार 2008 में आगरा की नालंदा बिल्डर्स की योजना में प्लॉट लेने आए थे। उस समय प्रमोटरों ने उन्हें यकीन दिलाया कि जल्द ही रजिस्ट्री हो जाएगी।
रमा सारस्वत के मुताबिक, समय बीतता गया और बिल्डर्स हर बार उन्हें नए आश्वासन देते रहे। उन्होंने बताया कि वे 2010, 2014 और 2018 में कई बार आगरा आकर आरोपियों से मिलीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बेटे की मौत और पति का हादसा
वर्ष 2024 रमा सारस्वत के लिए सबसे बड़ा दुःख लेकर आया। उनका इकलौता बेटा नितिन सारस्वत, जो कैंसर से जूझ रहा था, 18 मार्च को दिल्ली में चल बसा। कुछ ही समय बाद उनके पति भी फिसल कर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दोहरी त्रासदी के बीच उन्होंने न्याय के लिए संघर्ष जारी रखा।
पुलिस की लापरवाही और देर से कार्रवाई
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने मार्च और जून 2025 में हरीपर्वत थाने का दरवाज़ा खटखटाया, एसएचओ से भी कई बार मिलीं, लेकिन कार्रवाई टाल दी गई। जब मीडिया में मामला आने की आहट हुई, तब जाकर आखिरकार हरीपर्वत थाना पुलिस ने अमानत में खयानत की धारा में मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस ने कहा- जांच अब शुरू हुई है
थाना हरीपर्वत के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला काफी पुराना और दस्तावेज़ों पर आधारित है। जांच के लिए पीड़िता से पुराने अनुबंध, रसीदें और बैंक लेनदेन मांगे गए हैं। पुलिस का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए तो अभियुक्तों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नालंदा बिल्डर्स ने कहा- शिकायतकर्ता पर कोई पेपर नहीं, झूठी शिकायत
इस बारे में नालंदा बिल्डर्स की ओर से बताया गया है कि जिन रमा सारस्वत ने एफआईआर लिखाई है, उनसे बार-बार पेपर मांगे गये हैं, लेकिन वे आज तक पेपर प्रस्तुत नहीं कर पाई हैं। यही नहीं, पुलिस ने भी इस मामले की प्रारंभिक जांच की थी, जिसमें कंपनी ने पुलिस से भी साफ कहा था कि शिकायतकर्ता पर लेन-देन के पेपर हों तो प्रस्तुत करें, हम हिसाब करने को तैयार नहीं हैं। पुलिस भी उनका पक्ष जानकर संतुष्ट थी, लेकिन फिर भी मुकदमा लिखे जाने पर हैरान हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और पुलिस की जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।