गुरमत कैंप के 40वें दिन गुरसिख बच्चों को सिखाई गई 'दस्तार' की मर्यादा

आगरा। शहीद नगर, विभव नगर स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार में चल रहे गुरमत समर कैंप के चालीसवें दिन गुरसिख बच्चों को सिख धर्म की प्रतीक ‘दस्तार’ (पगड़ी) बांधने का प्रशिक्षण दिया गया। यह आयोजन गुरमत, गुरबाणी, शस्त्रविद्या और गुरु इतिहास की गहन साधना के साथ सम्पन्न हुआ।

Jun 29, 2025 - 22:43
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गुरमत कैंप के 40वें दिन गुरसिख बच्चों को सिखाई गई 'दस्तार' की मर्यादा
गुरमत कैंप में बच्चों को पगड़ी बांधना सिखाते समाज के वरिष्ठजन।  

प्रातः अमृतवेला में श्री सुखमनी साहिब और श्री चौपाई साहिब के पाठ के साथ भाई जगतार सिंह हजूरी रागी द्वारा “पुता माता की आसीस” शब्द कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसने संगत को आत्मिक आनंद से भर दिया। इसके पश्चात ज्ञानी मंशा सिंह जी ने धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष अरदास की।

गुरुघर के सेवक हरपाल सिंह ने गुरुद्वारा मर्यादा अनुसार बच्चों को दस्तार बांधने की विधि सिखाई। उन्होंने बताया कि दस्तार केवल एक सिर ढकने का वस्त्र नहीं, बल्कि सिख धर्म की गरिमा, आत्मगौरव और जिम्मेदारी का प्रतीक है, जिसे धैर्य और श्रद्धा से धारण करना आवश्यक है।

इस अवसर पर हरपाल सिंह, राजू सलूजा, श्याम भोजवानी, मलकीत सिंह, गुरिंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह लवली, इंद्रजीत सिंह, लाडी वीर, हरजिंदर सिंह, देवेंद्र सिंह जुल्का, हरजीत सिंह भसीन समेत कई संगतजन उपस्थित रहे।

गुरमत कैंप में गुरमुखी बोलना, लिखना, पढ़ना, शस्त्र विद्या, कीर्तन, और गुरु इतिहास का गहन अध्ययन करवा कर आने वाली पीढ़ी को सिख परंपराओं से जोड़ने का संकल्प लिया गया है।

SP_Singh AURGURU Editor