मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 72 वर्षीय बुजुर्ग से 20 लाख की साइबर ठगी
आगरा में साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 72 वर्षीय बुजुर्ग से 20 लाख रुपये की ठगी कर ली। फर्जी जांच एजेंसी बनकर लगातार दबाव बनाया गया और डिजिटल ट्रांसफर कराए गए। अब साइबर क्राइम थाना मामले की जांच कर रहा है और रकम की रिकवरी की कोशिशें जारी हैं।
फर्जी जांच एजेंसी बनकर की गई कॉल, गिरफ्तारी की धमकी देकर डिजिटल ट्रांसफर कराए गए पैसे
आगरा। जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन अपराध का डर दिखाकर एक 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को मानसिक दबाव में ले लिया और उनसे 20 लाख रुपये की ठगी कर ली। यह पूरी ठगी एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसने पीड़ित और उसके परिवार की जीवनभर की जमा-पूंजी छीन ली।
पीड़ित हरिवंच पुत्र रोशन लाल, निवासी कुकावर, बिरहरू (आगरा) को कॉल करने वालों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर 6 करोड़ रुपये से अधिक का मनी लॉन्ड्रिंग फ्रॉड किया गया है और उनके खिलाफ केस दर्ज है। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को भी इसकी जानकारी दी, तो तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है।
लगातार डर और दबाव की रणनीति
पुलिस के मुताबिक, यह फर्जी प्रकरण अक्टूबर 2025 के अंत में शुरू हुआ। ठग लगातार फोन कॉल और डिजिटल माध्यमों से संपर्क में रहे और पीड़ित से उनकी व्यक्तिगत व बैंक संबंधी जानकारियां हासिल कर लीं। मानसिक दबाव और डर के माहौल में दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में अलग-अलग तारीखों पर पीड़ित के खातों से कुल 20 लाख रुपये डिजिटल ट्रांसफर करा लिए गए।
सच्चाई सामने आने पर दर्ज हुई शिकायत
कुछ समय बाद जब पीड़ित को पूरे घटनाक्रम की सच्चाई समझ में आई, तब उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस जांच और रिकवरी की कोशिश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। बैंक लेन-देन, डिजिटल ट्रेल और जिन खातों में पैसा भेजा गया, उनकी गहन जांच की जा रही है। साथ ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और ठगी गई रकम की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि वह शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं और इस घटना से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है, क्योंकि उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी इस ठगी में चली गई।