73 साल पुराना जन्म प्रमाण पत्र मांगा जा रहा, आधार जन सेवा केंद्र के व्यवहार से आहत वरिष्ठ अधिवक्ता ने डीएम से लगाई गुहार
आगरा। आधार से पैन और बैंक खाता लिंक न हो पाने की समस्या को लेकर एक वरिष्ठ अधिवक्ता को आधार जन सेवा केंद्र में कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इस संबंध में जिलाधिकारी आगरा को एक लिखित शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आधार जन सेवा केंद्र, खंदारी, आगरा के इंचार्ज ने उनसे 73 वर्ष पहले का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की मांग की और वैध शैक्षणिक दस्तावेजों को अस्वीकार करते हुए दुर्व्यवहार किया।
अपने शिकायती पत्र में रमाशंकर शर्मा ने बताया कि उनका जन्म 5 मार्च 1953 को ग्राम पिपरौली, जनपद उस समय आगरा (वर्तमान में फिरोजाबाद) में हुआ था। वे 1971 से आगरा में निवास कर रहे हैं और आगरा में ही उनका आधार कार्ड बनाया गया है। आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि केवल 1953 अंकित है, दिन और माह दर्ज न होने के कारण उनका आधार पैन कार्ड एवं बैंक खाते से लिंक नहीं हो पा रहा है।
श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल परीक्षा 1969 एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 1971 में श्री आर.आर.एम. इंटर कॉलेज, उस समय आगरा (अब फिरोजाबाद) से उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने बी.ए. एवं एम.ए. की परीक्षा आरबीएस कॉलेज से तथा एल.एल.बी. की परीक्षा आगरा कॉलेज से उत्तीर्ण की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उस समय केवल हाईस्कूल की सनद में ही जन्मतिथि अंकित की जाती थी, जबकि इंटरमीडिएट, बी.ए., एम.ए. एवं एल.एल.बी. के प्रमाण पत्रों में जन्मतिथि का उल्लेख नहीं होता था। हालांकि उनकी इंटरमीडिएट की टी.सी. (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) में जन्मतिथि दर्ज है।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि 9 फरवरी 2026 को वे हाईस्कूल की मूल सनद, इंटरमीडिएट की मार्कशीट व टी.सी., बी.ए., एम.ए. एवं एल.एल.बी. के मूल प्रमाण पत्र लेकर आधार जन सेवा केंद्र, खंदारी के इंचार्ज से समय लेकर मिले। आरोप है कि इंचार्ज ने सभी दस्तावेजों को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि हाईस्कूल की सनद बहुत पुरानी है और अन्य प्रमाण पत्रों में जन्मतिथि दर्ज नहीं है। उन्होंने कथित रूप से सभी कागजात फेंक दिए और कहा कि पहले जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर लाइए, तभी काम होगा।
श्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने यह समझाने का प्रयास किया कि 1953 के समय जन्म प्रमाण पत्र बनाए ही नहीं जाते थे और अब 73 वर्ष बाद ऐसा प्रमाण पत्र बनवाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके बावजूद इंचार्ज ने उनकी बात नहीं सुनी और कथित तौर पर उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया तथा कहा कि जाइए, कुछ भी कर लीजिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने जिलाधिकारी आगरा से अनुरोध किया है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर उनका जन्म प्रमाण पत्र 5 मार्च 1953 का बनवाया जा सकता है, तो उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए, ताकि आम नागरिकों और वरिष्ठ व्यक्तियों को इस प्रकार की कठिनाइयों और अपमान का सामना न करना पड़े।