75 साल पुराने लाभचंद मार्केट पर संकट के बादल: दुकानदारों ने डीएम से मांगा संरक्षण, विध्वंस की आशंका जताई

आगरा। शहर के व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्रों में शुमार राजा मंडी स्थित लाभचंद मार्केट एक बार फिर संकट के दौर से गुजरता नजर आ रहा है। करीब 75 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक बाजार के 25 से अधिक विधिसम्मत किरायेदारों एवं दुकानदारों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को प्रार्थना पत्र सौंपा और बाजार के विरुद्ध कथित रूप से चलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण अभियानों पर गंभीर चिंता जताई। दुकानदारों ने आशंका व्यक्त की कि झूठी शिकायतों के आधार पर बाजार पर विध्वंसात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिससे तमाम परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

Feb 13, 2026 - 14:23
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75 साल पुराने लाभचंद मार्केट पर संकट के बादल: दुकानदारों ने डीएम से मांगा संरक्षण, विध्वंस की आशंका जताई
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को प्रार्थना पत्र सौंपते लाभचंद मार्केट, राजा मंडी के दुकानदार।

पट्टे वैध, निर्माण स्वीकृत, फिर अवैधता का आरोप क्यों?

दुकानदारों ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया कि लाभचंद मार्केट दो वैध पट्टों पर निर्मित है, जो शासन द्वारा क्रमशः वर्ष 1940 और 1947 में विधिवत प्रदान किए गए थे। बीते 75 वर्षों से अधिक समय में किसी भी प्राधिकरण ने न तो इन पट्टों को अवैध घोषित किया और न ही बाजार को अतिक्रमण की श्रेणी में रखा।
उन्होंने बताया कि बाजार का निर्माण स्वीकृत भवन मानचित्रों के अनुरूप किया गया था। फुटपाथ पर दिखाई देने वाले खंभे भी 1950 के दशक में स्वीकृत बरामदा संरचना का हिस्सा हैं। दुकानों का आवंटन उसी समय किराया कलेक्टर द्वारा विधिसम्मत तरीके से किया गया था। ऐसे में छह दशकों बाद अचानक अवैधता का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार और संदिग्ध है।

किराया विवाद से भड़का पूरा मामला

दुकानदारों के अनुसार मौजूदा विवाद की जड़ किराया वृद्धि से जुड़ी है। आरोप लगाया गया कि कुछ किरायेदार आज भी 50 से 100 रुपये प्रतिमाह जैसे दशकों पुराने किराये पर दुकानें संचालित कर रहे हैं, जबकि वे दुकानों के सामने बैठने वाले फेरीवालों से भारी रकम वसूलते हैं।
एक प्रकरण में तो दुकान को 1,25,000 रुपये प्रतिमाह पर उपकिराये पर दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है, जबकि उसका मूल किराया मात्र 112.50 रुपये बताया गया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ऐसे विवादों में विधिसम्मत किराया देने वाले दुकानदारों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

गाटा संख्या 287 को लेकर भ्रम

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि कुछ शिकायतों में पट्टे की भूमि को गाटा संख्या 287 (सड़क भूमि) बताया जा रहा है। जबकि 10 फरवरी 2026 को हुए आधिकारिक सीमांकन में यह स्पष्ट हुआ कि महात्मा गांधी रोड से कनहैया बिल्डिंग के पश्चिमी छोर तक राजा मंडी रोड का क्षेत्रफल ही 1270 वर्गमीटर से अधिक है, जो कथित गाटा संख्या 287 के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा बताया गया है। दुकानदारों के अनुसार यह तथ्य ही इस दावे को झूठा साबित करता है कि पूरी पट्टे की भूमि सड़क भूमि में आती है।

कथित जालसाजी की जांच की मांग

दुकानदारों ने आरोप लगाया कि बीते दो दशकों में विभिन्न संगठनों के माध्यम से साइक्लोस्टाइल हस्ताक्षर पत्रकों पर आधारित शिकायतें दी गईं, जिनमें कथित तौर पर मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी पाए गए। उन्होंने इन हस्ताक्षरों की स्वतंत्र जांच कराकर जालसाजी के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।

दुकानदारों ने जिलाधिकारी से 10 फरवरी 2026 के क्षेत्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्ष सार्वजनिक करने, झूठी व प्रेरित शिकायतों के आधार पर किसी भी विध्वंसात्मक या दमनात्मक कार्रवाई पर रोक, पट्टा समाप्ति की परिस्थितियों व उसके विधिसम्मत पुनर्स्थापन की स्वतंत्र जांच और विधिसम्मत किरायेदारों व कर्मचारियों को तत्काल संरक्षण की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल अभिषेक जैन, पुष्पेंद्र तोमर, अनूप गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, वासुदेव, सुधीर नाहर, सनी राजपूत, आरसी गुप्ता सहित अन्य दुकानदारों ने कहा कि लाभचंद मार्केट से जुड़े अधिकांश परिवार तीसरी पीढ़ी से यहां व्यवसाय कर रहे हैं और सैकड़ों लोगों की आजीविका इस बाजार पर निर्भर है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्यायोचित निर्णय की अपेक्षा जताई, ताकि वर्षों पुरानी वैध बाजार व्यवस्था को किसी भी दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से बचाया जा सके।

SP_Singh AURGURU Editor