आगरा में दीवार बनी ‘धार्मिक बॉर्डर’, दशकों पुराना साथ टूटा, सवालों के घेरे में प्रशासन
आगरा के ज्योति नगर–बैंक कॉलोनी में दशकों से साथ रह रहे हिंदू–मुस्लिम परिवारों के बीच रात में दीवार बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया। हिंदू पक्ष इसे सुरक्षा का कदम बता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे अवैध और भेदभावपूर्ण बता रहा है। कांग्रेस ने इसे गंगा-जमुनी तहज़ीब पर हमला बताया है। मामला प्रशासन की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
ज्योति नगर–बैंक कॉलोनी में हिंदू–मुस्लिम आबादी के बीच खड़ी की गई दीवार, रात में हुए निर्माण पर उठा विवाद
आगरा। आगरा के थाना सदर क्षेत्र स्थित ज्योति नगर–बैंक कॉलोनी से सामाजिक सौहार्द को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां दशकों से आपसी भाईचारे के साथ रह रहे हिंदू और मुस्लिम परिवारों के बीच अचानक एक दीवार खड़ी कर दी गई, जिसने न सिर्फ रास्ता बंद किया बल्कि पूरे इलाके को दो हिस्सों में बांट दिया। एक तरफ हिंदू परिवार, तो दूसरी ओर मुस्लिम परिवार। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह दीवार करीब 30 साल पुराने रास्ते पर बनाई गई है, जिसका उपयोग दोनों समुदाय समान रूप से करते आ रहे थे। अब इस दीवार को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हिंदू पक्ष का दावा-भय का माहौल था
हिंदू पक्ष का कहना है कि उन्हें मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों से डर और असुरक्षा का माहौल महसूस हो रहा था। इसी वजह से प्रशासन को सूचना देकर दीवार का निर्माण कराया गया, ताकि शांति बनी रहे और किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।
मुस्लिम पक्ष का आरोप-रात में क्यों बनी दीवार?
वहीं मुस्लिम पक्ष ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध और भेदभावपूर्ण बताया है। उनका सवाल है कि अगर दीवार बनाना पूरी तरह वैध था, तो फिर रात 1:30 बजे चुपचाप निर्माण क्यों कराया गया? दिन के उजाले में काम क्यों नहीं हुआ? मुस्लिम समाज का यह भी आरोप है कि प्रशासन उनकी जमीन और रास्ते से जुड़े कागजातों को देखने को तैयार नहीं, जबकि वे वर्षों से उसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस ने बताया सामाजिक सौहार्द पर हमला
मामले को लेकर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह के साथ मिलकर शिकायत दर्ज कराई। अमित सिंह ने कहा कि सड़क पर दीवार बनाकर धर्म के नाम पर गंगा-जमुनी तहज़ीब को बांटा जा रहा है। यह आगरा की पहचान के खिलाफ है। प्रशासन को निष्पक्ष होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल है कि क्या बिना दोनों पक्षों को सुने दीवार बनवाना उचित था? क्या सार्वजनिक रास्ते पर निर्माण नियमों के अनुरूप है? फिलहाल मामला गरमाया हुआ है और स्थानीय लोग प्रशासन से दीवार हटाने व निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।