क्या किसी हादसे का इंतज़ार है? आगरा में जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवन, मासूमों के लिए खतरा

आगरा। राजस्थान में स्कूल की छत गिरने से मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद भी आगरा के अफसर नहीं जागे हैं। जिले के कई प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र खुद हादसे को दावत दे रहे हैं। बारिश के मौसम में छतों से टपकता पानी, जर्जर दीवारें और अधूरी निर्माण योजनाएं बच्चों की सुरक्षा से खुले तौर पर खिलवाड़ कर रही हैं। लेकिन शिक्षा विभाग और अन्य विभाग की आंखें अब भी बंद हैं।

Aug 1, 2025 - 13:32
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क्या किसी हादसे का इंतज़ार है? आगरा में जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवन, मासूमों के लिए खतरा
खंदौली ब्लाक के वासजोखी गांव के प्राइमरी स्कूल के सामने खुदी पड़ी नींव। दूसरा चित्र सैयां ब्लाक के नदीम गांव के आंगनबाड़ी भवन का है।

वासजोखी गांव के स्कूल में तालाब बन जाते हैं क्लासरूम

ब्लॉक खंदौली की सेमरा ग्राम पंचायत के मजरा वासजोखी स्थित प्राथमिक विद्यालय की हालत इतनी दयनीय है कि बरसात में क्लासरूम पानी से भरकर तालाब बन जाते हैं। छतों से लगातार पानी टपकता है, बच्चे भीगते हैं और कई बार आधे दिन में स्कूल छोड़कर लौट जाते हैं। पढ़ाई खुले आसमान के नीचे हो रही है और बारिश आने पर बंद हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच सालों से स्कूल में कोई रंगाई-पुताई या मरम्मत नहीं हुई है। एक नया कमरा स्वीकृत हुआ था और उसका पैसा भी एक साल पहले विद्यालय के खाते में आ चुका है, लेकिन नींव खुदी रह गई है, निर्माण शुरू ही नहीं हुआ। नींव में पानी भर जाता है और स्थिति पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। खुदी नींव में पानी भरने पर उसमें बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है क्योंकि खुदी नींव पर कोई बेरिकेडिंग भी नहीं है।

इस पूरे मामले की शिकायत भारतीय किसान यूनियन स्वतंत्र के प्रदेश प्रभारी सुनील कुमार ने अधिकारियों खंदौली के एबीएसए, बीएसए आगरा, एसडीएम एत्मादपुर और बीडीओ खंदौली को भेज दी है। सुनील कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

सैयां के नदीम गांव के आंगनबाड़ी भवन में आईं दरारें

आगरा के सैयां ब्लॉक के गांव नदीम में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की छत और दीवारें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि किसी भी वक्त गिर सकती हैं। दीवारों में दरारें हैं और छत की प्लास्टरिंग नीचे झड़ने लगी है, जिससे नीचे बैठकर पढ़ रहे मासूम बच्चों की जान को खतरा है।

बारिश के मौसम में जब दीवारें भीगती हैं, तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा। कई वर्षों से इस भवन की मरम्मत तक नहीं हुई है।

यह हाल तब है जब प्रदेश में सरकारी स्तर पर मिशन कायाकल्प जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। फिर भी ऐसे आंगनबाड़ी भवन लापरवाही की पोल खोल रहे हैं। शिक्षा विभाग को कब झकझोरेगा ज़मीन पर उतरता दर्दनाक सच? क्या इंतज़ार सिर्फ किसी हादसे का है?

SP_Singh AURGURU Editor