साइबर ठगी का ‘खाता जाल’: जनसेवा केंद्र संचालक समेत तीन गिरफ्तार, खाते और क्यूआर कोड का खेल
आगरा। ऑनलाइन साइबर ठगी के पीछे सक्रिय खाता और क्यूआर कोड सप्लायर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए साइबर सेल और थाना जगदीशपुरा पुलिस ने तीन शातिर युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी भोलेभाले लोगों से उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड की जानकारी लेकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, बदले में कमीशन लिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन जनसेवा केंद्र चलाने वाला अभय वर्मा कर रहा था, जिसके साथ दो अन्य आरोपी भी जुड़ गए थे।
-साइबर ठगों को देते थे बैंक खातों की ‘सप्लाई’, एटीएम से निकाल लेते थे ठगी की रकम
जनसेवा केंद्र की आड़ में ‘साइबर ट्रेडिंग’
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि थाना जगदीशपुरा क्षेत्र के रामनगर निवासी साहिल निगम की शिकायत पर जांच शुरू हुई थी। साहिल ने बताया कि उसे संदिग्ध कॉल्स और मैसेज आने लगे थे। इस दौरान बोदला सेक्टर-4 में जनसेवा केंद्र चलाने वाले अभय वर्मा ने उसका भरोसा जीतकर बैंक खाता, एटीएम कार्ड और अन्य विवरण ले लिए।
एटीएम कार्ड पहुंचा गिरोह के पास
अभय ने साहिल का एटीएम कार्ड अपने साथियों कुन्दन उर्फ कार्तिक (लोहामंडी) और प्रियांशु (लोहामंडी) को दे दिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर साहिल के खाते में आई रकम को निकाल लिया। साहिल को तब शक हुआ जब खाते में रकम आकर तुरंत निकल जाती थी।
गेमिंग ऐप के नाम पर शुरू हुआ खेल
पूछताछ में सामने आया कि अभय वर्मा का जनसेवा केंद्र ‘अपना कम्युनिकेशन साइबर कैफे’ के नाम से चलता है। वहीं उसकी मुलाकात आयुष नामक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को गेमिंग ऐप से जुड़ा बताकर बैंक खाते, एटीएम और क्यूआर कोड मांगे। अभय को कमीशन का लालच दिया गया, जिसे उसने स्वीकार कर लिया।
नेटवर्क में जुड़े और साथी
जल्द ही अभय के जनसेवा केंद्र पर काम करने वाले कुन्दन उर्फ कार्तिक और प्रियांशु भी इस नेटवर्क में शामिल हो गए। तीनों ने कई लोगों से खाते और क्यूआर कोड एकत्र कर आयुष व उसके साथी मुकेश तक पहुंचाए।
ठगी की रकम सीडीएम से ट्रांसफर
डीसीपी के अनुसार, अभय द्वारा मुहैया कराए गए खातों में साइबर ठगों की ठगी की रकम जमा होती थी, जिसे सीडीएम मशीन के माध्यम से निकाला या अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। अभय इसमें से कमीशन लेता था।
आरोपियों ने कबूला अपराध
गिरफ्तार अभियुक्तों अभय वर्मा, कुन्दन उर्फ कार्तिक, और प्रियांशु ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने योजना बनाकर लोगों को बहलाकर बैंकिंग डिटेल लीं और उन्हें साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराया। पुलिस अब उन खातों की जांच कर रही है जिनके जरिये रकम ट्रांसफर की गई थी।
गिरफ्तारी से उभरे नए लिंक
पुलिस को पूछताछ में आयुष और मुकेश जैसे नाम मिले हैं, जो इस गिरोह के मास्टरमाइंड हो सकते हैं। इनकी तलाश की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी की रकम को आगे कहां और कैसे भेजा गया।