आगरा की विरासत को समेटती आदर्श नंदन गुप्त की कृति ‘संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहरः आगरा’ प्रभु चरणों में अर्पित

आगरा। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहरों से समृद्ध आगरा की पहचान को एक ही पुस्तक में समेटने का सार्थक प्रयास साहित्यसेवी आदर्श नंदन गुप्ता ने किया है। उनकी पुस्तक संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहरः आगरा को शनिवार को श्रद्धा भाव से लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में प्रभु चरणों में अर्पित किया गया। आयोजन धार्मिक आस्था और साहित्यिक गरिमा का अद्भुत संगम बन गया।

Apr 11, 2026 - 22:17
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आगरा की विरासत को समेटती आदर्श नंदन गुप्त की कृति ‘संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का शहरः आगरा’ प्रभु चरणों में अर्पित
लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर में अपनी नई पुस्तक को प्रभु चरणों में अर्पित करते आदर्श नंदन गुप्त और अन्य साहित्यसेवी।

कार्यक्रम मंदिर के महंत डोरीदास उपाध्याय के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जबकि पूजा-अर्चना महंत गोविंद उपाध्याय द्वारा विधिवत कराई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने पुस्तक को आगरा की सांस्कृतिक आत्मा का दस्तावेज बताया।

पुस्तक की भूमिका लेखक एवं आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि यह कृति नई पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिसमें आगरा के विविध क्षेत्रों की प्रमाणिक जानकारी दी गई है। साहित्यकार डॉ. शशि गोयल ने अपने संदेश में कहा कि पुस्तक में आगरा की कला, संस्कृति और परंपराओं को समाहित करने का सराहनीय प्रयास किया गया है।

सेंट एंड्रयूज स्कूल के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि जो छात्र आगरा को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक अनिवार्य है। वहीं उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सम्मान से सम्मानित कवि कुमार ललित ने कहा कि ऐसे साहित्य की आज समाज को अत्यंत आवश्यकता है।

लेखक आदर्श नंदन गुप्ता ने बताया कि यह पुस्तक उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की अनुदान योजना के अंतर्गत प्रकाशित की गई है। लगभग 120 पृष्ठों की इस पुस्तक में 16 पृष्ठ रंगीन चित्रों के हैं, जिनमें आगरा के विविध सांस्कृतिक आयोजनों और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में पार्षद पूजा बंसल, गिर्राज बंसल, साहित्यसेवी संजय गुप्ता, शरद गुप्ता, जितेंद्र निगम, निरुपमा, अनुभूति, आदीपिका सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि आगरा केवल ऐतिहासिक धरोहरों का शहर नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का जीवंत केंद्र भी है।

SP_Singh AURGURU Editor