मथुरा में हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन! चार-चार कॉलेजों की सड़क पर ‘अवैध बस अड्डा’, पुलिस चौकियां मूकदर्शक
मथुरा। क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा मथुरा प्रशासन? क्या पांच हजार छात्र-छात्राओं की ज़िंदगी की कीमत किसी एक ट्रैवल एजेंसी और चंद कारोबारियों की आमदनी से भी कम हो चुकी है? मथुरा शहर के सबसे संवेदनशील शिक्षा क्षेत्र मसानी तिराहा से चौक बाजार की सड़क को अब ‘अवैध बस स्टैंड’, लोडिंग-अनलोडिंग ज़ोन और कारोबारियों की निजी पार्किंग बना दिया गया है। और यह सब कुछ हो रहा है दो-दो पुलिस चौकियों की नाक के नीचे!
इस सड़क के दोनों ओर सौ मीटर के दायरे में आरसीए गर्ल्स पीजी कॉलेज, श्री चमेली देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज, अनारदेवी महिला पॉलिटेक्निक, और डीएवी इंटर कॉलेज हैं। ये चारों संस्थान मिलकर क्षेत्र में लगभग 5000 छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। लेकिन इनकी सुरक्षा अब भगवान भरोसे है। सड़क किनारे खुली ट्रैवल एजेंसी ने इसे खुला बस अड्डा बना दिया है, जहां दिन भर पर्यटक बसें सवारियां उतारती और बैठाती देखी जा सकती हैं। इसके अलावा ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली, मैटाडोर, बुग्गी और भारी वाहन लोडिंग-अनलोडिंग में लगे रहते हैं।
मासूम छात्र-छात्राओं की जान से हो रहा खिलवाड़
यही वह सड़क है जहां अनारदेवी पॉलीटेक्निक की एक छात्रा की जान जा चुकी है, डीएवी कॉलेज का छात्र गंभीर रूप से घायल हो चुका है। इन हादसों के बावजूद न प्रशासन चेता, न ही पुलिस की आंख खुली। ट्रैफिक जाम का आलम ये है कि जब कॉलेज की छुट्टी होती है, तो हजारों बच्चों के बीच से ट्रैक्टर और ट्रक निकलते हैं।
सवाल उठते हैं सीधे पुलिस व प्रशासन पर
क्या वृंदावन गेट पुलिस चौकी और मसानी पुलिस चौकी इस समस्या से अंजान हैं? जवाब साफ है- नहीं। स्थानीय लोग साफ तौर पर कहते हैं- पुलिस की मिलीभगत के बिना सड़क पर यह धंधा चल ही नहीं सकता।
एक सवाल यह भी है कि आखिर क्यों दो साल पहले तत्कालीन डीएम द्वारा दिए गए अवैध बस स्टैंड हटाने के आदेश पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
इन कॉलेजों के प्रिंसिपल और सामाजिक संगठन कई बार प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं कि मसानी तिराहे पर स्पीड ब्रेकर बनवाइए, ट्रैफिक पुलिस तैनात कीजिए, अवैध बसों को हटाइए। लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों में यह सब फाइलों की कब्रगाह में दम तोड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? क्या शिक्षा के गढ़ को हादसों का अड्डा बनाने की तैयारी है? क्या सस्ती राजनीति और मिलीभगत में बच्चों की सुरक्षा को गिरवी रख दिया गया है? अगर नहीं, तो अब कार्रवाई क्यों नहीं?