दशकों की पीड़ा के बाद ‘वायु’ को मिला सहारा, मथुरा के हाथी अस्पताल में शुरू हुआ इलाज

मथुरा। दशकों तक क्रूरता और उपेक्षा झेलने के बाद, 52 वर्षीय घायल नर हाथी वायु को वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम द्वारा असम से रेस्क्यू कर मथुरा स्थित विश्व के पहले समर्पित हाथी अस्पताल में लाया गया है।

Apr 25, 2025 - 18:14
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दशकों की पीड़ा के बाद ‘वायु’ को मिला सहारा, मथुरा के हाथी अस्पताल में शुरू हुआ इलाज
दो हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर मथुरा के वाइल्डलाइफ एसओएस अस्पताल लाया गया घायल हाथी ‘वायु’।

लगभग 2,000 किलोमीटर की कठिन यात्रा के बाद अब वायु को विशेषज्ञ चिकित्सकों और केयर स्टाफ की देखरेख में रखा गया है, जहां उसके उपचार का नया अध्याय शुरू हो चुका है।

वायु का जीवन बेहद दर्दनाक रहा। लकड़ी ढोने जैसे श्रमसाध्य कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के दौरान नागालैंड में एक हादसे में उसका बायां पैर बुरी तरह टूट गया था। समय पर इलाज न मिलने की वजह से उसे गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही, एनीमिया और परजीवी संक्रमण ने उसकी हालत और बिगाड़ दी।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया, यह हमारे लिए एक विशेष अभियान रहा, क्योंकि यह असम से किया गया हमारा पहला रेस्क्यू था। वायु की गंभीर स्थिति ने हमें उसे विशेषज्ञ देखभाल देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। अब जब वह अस्पताल में है, हम उसके रिकवरी पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

एक विशेष रूप से सुसज्जित हाथी एम्बुलेंस में वायु को मथुरा लाया गया। इस दौरान एक अनुभवी पशु चिकित्सा टीम, केयर गिवर्स और पोषण विशेषज्ञ लगातार उसकी देखरेख करते रहे।

सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा, हम हर रेस्क्यू से पहले सुनिश्चित करते हैं कि जानवर को मानसिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित महसूस हो। यात्रा से पहले वायु को कम तनाव में रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए।

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ई. गोचलन ने बताया कि वायु को एनीमिया, कैल्शियम की कमी और अपंग चाल जैसी कई समस्याएं हैं। हमने रास्ते भर उसके हाइड्रेशन, आराम और दर्द प्रबंधन का ध्यान रखा। उम्मीद है कि इलाज से उसे राहत और सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा।

वाइल्डलाइफ एसओएस के कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स डायरेक्टर बैजूराज एम.वी. ने कहा, हर रेस्क्यू के पीछे एक समर्पित टीम होती है। वायु अब एक नई शुरुआत की ओर बढ़ रहा है, और हम उसके साथ हैं।