अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहराने के बाद बोले पीएम मोदी- आज सदियों के घाव भर रहे हैं, पीड़ा को विराम मिल रहा है और पांच सौ सालों की यज्ञ अग्नि शांत हुई  

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर मंगलवार को धर्मध्वज फहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण बताया। ध्वजारोहण के इस अलौकिक पल को उन्होंने प्राण जाए पर वचन न जाई... की प्रेरणा से जोड़ते हुए कहा कि यह ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि सदियों की वेदना, इंतजार और संकल्पों की सिद्धि का साक्षी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु को छू रही है, पूरा भारत और विश्व राममय है और करोड़ों रामभक्तों के दिलों में असीम आनंद उमड़ रहा है। सदियों से चले आ रहे घाव भर रहे हैं और पीड़ा को विराम मिल रहा है। सपनों का साकार रूप सामने खड़ा है।

Nov 25, 2025 - 14:21
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अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहराने के बाद बोले पीएम मोदी- आज सदियों के घाव भर रहे हैं, पीड़ा को विराम मिल रहा है और पांच सौ सालों की यज्ञ अग्नि शांत हुई   

धर्मध्वज फहराये जाने के बाद राम मंदिर परिसर में मौजूद सनातनियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज उस यज्ञ की पूर्णाहुति हुई है जिसकी अग्नि पांच सौ वर्षों तक प्रज्ज्वलित रही। भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा प्रतिष्ठित हुई है और राम मंदिर के शिखर पर फहराया गया यह धर्मध्वज भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना और गौरव के पुनर्जागरण का ध्वज है।

उन्होंने कहा कि इस ध्वज का भगवा रंग त्याग और तपस्या का प्रतीक है। इस पर अंकित सूर्यवंश की चिन्हावली भगवान राम की परंपरा को दर्शाती है, वर्णित ‘ओम’ शब्द सनातन ऊर्जा का आधार है और कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति और समृद्धि का प्रतिरूप है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ध्वज प्रेरणा बनेगा कि प्राण भले चले जाएं, पर वचन न जाए। यह विश्व को कर्म और कर्तव्य की प्रधानता का संदेश देगा, समाज में सुख, शांति और समरसता की कामना करेगा और हर प्रकार के भेदभाव व कष्ट से मुक्ति का मार्ग दिखाएगा।

प्रधानमंत्री ने विश्वभर के करोड़ों रामभक्तों को इस पवित्र क्षण की शुभकामनाएं दीं और उन सभी दानवीरों, भक्तों, शिल्पियों और कारीगरों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या वह धरती है जहां आदर्श आचरण में बदल जाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब भगवान राम वनवास को गए थे तब वे युवराज थे, लेकिन लौटकर वे मर्यादा पुरुषोत्तम बने और इस यात्रा में असंख्य लोगों का योगदान रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर में स्थित माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य और संत तुलसीदास की प्रतिमाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रामलला के साथ इन महान ऋषियों का एक ही स्थान पर दर्शन होना भारत की आध्यात्मिक परंपरा की विराटता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं यह संदेश देती हैं कि बड़े संकल्पों को सिद्ध करने में छोटे से छोटे प्रयास भी अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि राम मंदिर के दर्शन के साथ सप्त मंदिर के भी दर्शन अवश्य करें।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने के संकल्प की पुकार भी दोहराई। उन्होंने कहा कि राम के चरित्र, मर्यादा और आदर्शों को आत्मसात किए बिना राष्ट्र के विकास का संकल्प अधूरा है। हमें अपने भीतर राम को जगाना होगा और अपने जीवन में राम की प्राण प्रतिष्ठा करनी होगी। इस दिवस से बड़ा अवसर इसके लिए कोई नहीं हो सकता।

मोदी ने अपने भाषण में मैकाले द्वारा देश पर थोपी गई गुलामी की मानसिकता का भी उल्लेख किया और कहा कि विदेशी वस्तुओं और विदेशी सोच के प्रति अंध-आकर्षण ने भारत के आत्मविश्वास को कमजोर किया। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दस वर्षों में देश इस मानसिकता से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा और आत्मनिर्भरता तथा सांस्कृतिक आत्मगौरव ही भारत के विकास का आधार बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 नवंबर का यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि युग परिवर्तन का क्षण है। राम मंदिर का धर्मध्वज आने वाली पीढ़ियों को राम के आदर्श, कर्तव्य और श्रेष्ठ चरित्र का संदेश देता रहेगा और युगों-युगों तक विश्व में भारतीय सभ्यता की कीर्ति फहराता रहेगा।

SP_Singh AURGURU Editor