छह साल की अनचाही कैद के बाद बिहार की मीनू को मिला अपनों का साथ!
-आरके सिंह- बरेली। बरेली। यहां के मानसिक चिकित्सालय में बीते चार वर्षों से बिना नाम और पहचान के भर्ती महिला आखिरकार अपने परिवार से मिल पाई। दरभंगा (बिहार) की रहने वाली मीनू (काल्पनिक नाम) की आंखें उस समय नम हो गईं, जब छह साल बाद उसे अपनी मां, पिता और बहन की झलक मिली। मीनू ने अपने परिवार को पहचानते ही दौड़कर गले लगा लिया। यह पल भावुकता और राहत का संगम था।
-बरेली मानसिक चिकित्सालय से दरभंगा के परिवार तक पहुंची इंसानियत की मिसाल, घर वापसी से छलके खुशी के आंसू
कन्नौज से बरेली तक की अनसुनी कहानी
18 अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में यह महिला मानसिक रूप से असंतुलित अवस्था में मिली थी। मेडिकल जांच के बाद 23 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कन्नौज ने उसे बरेली मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराने का आदेश दिया। 27 अक्टूबर को कन्नौज पुलिस ने मीनू को सभी औपचारिकताओं के बाद भर्ती करा दिया।
मनो समर्पण संस्था बनी रिश्तों की पुनःस्थापना का पुल
बरेली स्थित मनो समर्पण संस्था के संस्थापक और वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक शैलेश शर्मा ने मीनू की नियमित काउंसलिंग कर उसकी मानसिक स्थिति में सुधार किया। लंबे प्रयासों के बाद मीनू ने अपने परिजनों की जानकारी दी, जिसके आधार पर संस्था ने दरभंगा में उसकी पहचान की पुष्टि की और परिवार को बरेली बुलाया।
परिवार की जुबानी दर्द और राहत की कहानी
मीनू के पिता चंदर राम ने बताया कि उनकी बेटी छह साल पहले मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद घर से निकल गई थी। हमने बहुत खोजा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आज उसे पाकर हमारी जिंदगी लौट आई है। मीनू की दो बेटियां भी हैं। पति के छोड़ने के बाद वह मायके में रह रही थी।
बिहार पुलिस ने कोई रेस्पॊन्स ही नहीं दिया
मानसिक चिकित्सालय की निदेशक डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी ने बताया कि बिहार पुलिस को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। परिजनों की पुष्टि के बाद मीनू को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आलोक शुक्ला के अनुसार, मीनू अब मानसिक रूप से स्वस्थ है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। नियमित फॉलोअप की जानकारी परिवार को दी गई है।
सामाजिक संस्थाओं का सराहनीय योगदान
सत्वा चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष संजीव पांडेय ने कहा कि मनो समर्पण का कार्य प्रेरणादायक है। हम भूले-बिसरे लोगों की आंखों, स्वास्थ्य और काउंसलिंग में भी सहयोग करते हैं। समाज को ऐसे प्रयासों से जुड़कर मानवता को नया जीवन देना चाहिए।