यूपी के बाद चार राज्यों में भी गन्ना उत्पादन बढ़ाएगी ‘बिस्मिल’ प्रजाति, किसानों की आय बढ़ेगी और चीनी उत्पादन में उछाल आएगा
-रमेश कुमार सिंह- बरेली। गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित ‘बिस्मिल’ प्रजाति के गन्ने को अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी खेती के लिए स्वीकृति मिल गई है। उच्च उत्पादन क्षमता और रोगरोधी गुणों से लैस यह किस्म न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि चीनी उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
अमर शहीद का नाम दिया गया ‘बिस्मिल’
इस उन्नत किस्म का उपनाम “बिस्मिल” काकोरी कांड के नायक, अमर शहीद पं. राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में रखा गया है। परिषद के निदेशक डॉ. वीके शुक्ल ने बताया कि अब तक यह किस्म केवल उत्तर प्रदेश में ही खेती के लिए स्वीकृत थी, लेकिन केंद्रीय समिति की मंजूरी के बाद अब इसे चार अन्य राज्यों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकेगा।
उत्पादन और गुणवत्ता में अव्वल
इस किस्म का तकनीकी नाम को.शा. (कोयंबटूर-शाहजहांपुर) 17231 है। इसके ब्रीडर डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि यह किस्म लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति पूरी तरह रोगरोधी है।
उन्होंने बताया कि औसत उत्पादन क्षमता 86.35 टन प्रति हेक्टेयर और चीनी परता (पोल % इन केन): 13.97 प्रतिशत है। यह आंकड़े इसे किसानों और चीनी मिलों, दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी बनाते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि बिस्मिल प्रजाति किसानों की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। वहीं गन्ना शोध परिषद के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि इस किस्म के बीज अब तक प्रदेश के सभी 42 गन्ना उत्पादक जनपदों में किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जिनके बेहतर और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता
निदेशक डॉ. वी. के. शुक्ल ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना के अंतर्गत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुल 25 फसलों की 184 नवीन किस्मों को स्वीकृति दी है, जिनमें को.शा. 17231 (बिस्मिल) भी शामिल है।
चार नए राज्यों में स्वीकृति मिलना संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।