यूजीसी ड्राफ्ट एक्ट 2026 के खिलाफ आगरा में भी उबाल, भाजपा नेता का खून से पीएम को पत्र
आगरा में UGC ड्राफ्ट एक्ट 2026 के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। बीजेपी नेता और पूर्व उपसभापति जगदीश पचौरी ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर इस कानून का विरोध किया। उनका आरोप है कि यह ड्राफ्ट शिक्षा व्यवस्था में असमानता बढ़ाएगा, सामान्य वर्ग के छात्रों में हीन भावना पैदा करेगा और झूठे मुकदमों का रास्ता खोलेगा। उन्होंने एक्ट में तीन गंभीर त्रुटियों का जिक्र करते हुए संशोधन या वापसी की मांग की है।
भाजपा नेता बोले-यह कानून छात्रों में हीन भावना बढ़ाएगा, जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन, ड्राफ्ट में ‘गंभीर त्रुटियों’ का दावा
आगरा। आगरा में यूजीसी ड्राफ्ट एक्ट 2026 को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस विरोध को नया और चौंकाने वाला मोड़ तब मिला, जब बीजेपी नेता और नगर निगम के पूर्व उपसभापति जगदीश पचौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर इस प्रस्तावित कानून का विरोध दर्ज कराया। भाजपा नेता जगदीश पचौरी ने इस ड्राफ्ट एक्ट को देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरनाक और असंतुलन पैदा करने वाला बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
“यूजीसी ड्राफ्ट 2026 से बढ़ेगी शैक्षणिक असमानता”
खून से लिखे पत्र में जगदीश पचौरी ने आरोप लगाया कि यूजीसी ड्राफ्ट एक्ट 2026 देश की शिक्षा प्रणाली में समानता की बजाय असमानता को बढ़ावा देगा। उनका कहना है कि इस कानून के लागू होने से विशेष रूप से सामान्य वर्ग के छात्रों में हीन भावना पैदा होगी, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस पर विचार नहीं किया गया, तो इसका असर सीधे तौर पर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक माहौल पर पड़ेगा।
झूठे मुकदमों का डर, छात्रों का भविष्य खतरे में
जगदीश पचौरी ने कहा कि ड्राफ्ट एक्ट के प्रावधान ऐसे हैं, जिनसे छात्रों और शिक्षकों पर झूठे मुकदमे दर्ज होने की आशंका बढ़ जाएगी। उनका दावा है कि आरोप लगाने की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया गया है कि बिना ठोस जांच के ही किसी छात्र या शिक्षक को दोषी ठहराया जा सकता है। इससे पढ़ाई का माहौल खराब होगा और युवा डर के साये में जीने को मजबूर होंगे। जगदीश पचौरी
तीन बड़ी त्रुटियों का आरोप, संशोधन की मांग
जगदीश पचौरी ने यूजीसी ड्राफ्ट एक्ट 2026 में तीन गंभीर त्रुटियों की ओर सरकार का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में OBC, SC, ST वर्ग का कोई भी छात्र बिना अनुमति किसी भी छात्र पर आरोप लगा सकता है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्र सीधे तौर पर निशाने पर आ सकते हैं। पचौरी के अनुसार बनाई गई जांच (इनक्वायरी) कमेटी में SC, ST और OBC वर्ग के सदस्यों की संख्या अधिक है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा। बार-बार आरोप और जांच प्रक्रिया के चलते छात्रों की पढ़ाई बाधित होगी, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
“हिंदू राष्ट्र की बात, लेकिन संतुलन जरूरी”
अपने बयान में जगदीश पचौरी ने वैचारिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को हम हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के असंतुलित कानून समाज में वैमनस्य पैदा करेंगे। सुधार जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखने के लिए है।
जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन
खून से पत्र लिखने के साथ-साथ जगदीश पचौरी ने आगरा जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि UGC ड्राफ्ट एक्ट 2026 को या तो वापस लिया जाए या उसमें तत्काल संशोधन किया जाए।