आगरा हथियार लाइसेंस घोटाला, एसटीएफ की जांच तेज,अब बाहरी राज्यों के निशानेबाज भी शक के घेरे में

आगरा। जिले में हथियारों के लाइसेंसों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद से एसटीएफ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है और शहर के कई प्रभावशाली लोगों को नोटिस भेजकर बयान तलब किए हैं। साथ ही कलक्ट्रेट स्थित आयुध कार्यालय से लाइसेंस संबंधी सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे गए हैं ताकि जारी करने की प्रक्रिया, सत्यापन और तारीखों की पड़ताल की जा सके।

Nov 13, 2025 - 11:33
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आगरा हथियार लाइसेंस घोटाला, एसटीएफ की जांच तेज,अब  बाहरी राज्यों के निशानेबाज भी शक के घेरे में
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बिल्डर रिंकेश अग्रवाल और कांग्रेस नेता हाजी जमीलुद्दीन को नोटिस जारी 
नोटिस से मचा हलचल, आयुध कार्यालय से दस्तावेज मांगे गए 
पुराने रिकॉर्ड और यूनिक आईडी की भी सघन पड़ताल

आगरा। जिले में हथियारों के लाइसेंसों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद से एसटीएफ ने मामले की गंभीरता को  देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है और शहर के कई प्रभावशाली लोगों को नोटिस भेजकर बयान तलब किए हैं। साथ ही कलक्ट्रेट स्थित आयुध कार्यालय से लाइसेंस संबंधी सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे गए हैं ताकि जारी करने की प्रक्रिया, सत्यापन और तारीखों की पड़ताल की जा सके।

24 मई को नाई की मंडी क्षेत्र में एसटीएफ इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कई व्यक्तियों ने जाली पहचान पत्र और भ्रामक जानकारी के आधार पर लाइसेंस और यहां तक कि कारतूस भी जारी करा लिए थे। इसी के आधार पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आर्म्स एक्ट के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

प्रारंभिक आरोपियों की सूची 

एफआईआर में शुरुआती चरण में जिन लोगों को आरोपी बताया गया है, वे हैं निशानेबाज मोहम्मद अरशद, कारपेट कारोबारी मोहम्मद जैद, प्रॉपर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, टीवी पत्रकार शोभित चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त विभागीय कर्मचारी संजय कपूर, राजेश बघेल, शिव कुमार सारस्वत। सूत्रों के अनुसार जांच आगे बढ़ने पर और भी सफेदपोश नाम सतह पर आए हैं, जिन्हें अब एसटीएफ पूछताछ के दायरे में ला रही है।

बाहरी राज्यों के निशानेबाजों पर संदेह 

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि राजस्थान और मध्य-प्रदेश के करीब 15 निशानेबाज खिलाड़ियों को कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से लाइसेंस और कारतूस जारी किए गए होने का शक है। इन खिलाड़ियों की पूर्ण सूची एवं संबंधित रिकॉर्ड आयुध कार्यालय को भेज दी गई है और अब उनसे जुड़ी सत्यापन प्रक्रियाओं, दस्तावेज़ों और लाइसेंस जारी करने की तारीखों की जांच की जा रही है। मामले में यह भी देखा जा रहा है कि क्या खेल/प्रशिक्षण दिखाकर बाहरी खिलाड़ियों ने स्थानीय लाइसेंस सिस्टम का दुरुपयोग किया है या नहीं। जांच अभी जारी है और सूत्रों के मुताबिक आगे कुछ और प्रभावशाली नाम भी सामने आ सकते हैं।

यूनिक आईडी स्कैम और विभागीय जवाबदेही

एसटीएफ यह भी देख रही है कि कुछ लाइसेंसों पर जो यूनिक आईडी नंबर दर्ज हैं वे वास्तविक हैं या कूटरचित। इस मामले में पहले से ही कुछ कर्मचारी संदिग्ध रहे हैं। तीन महीने पहले आयुध कर्मचारी प्रशांत कुमार निलंबित किए जा चुके हैं और नाई की मंडी के संविदा कर्मचारी पंकज कुमार पर भी एफआईआर दर्ज है। जांच टीम पुराने रिकॉर्ड, सत्यापन दस्तावेज़ और लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया की बारीकियों को खंगाल रही है ताकि नियमों में छेद कहां  पर हुए, यह स्पष्ट हो सके।

नोटिस पाए गए प्रमुख नाम और उनका बयान

एसटीएफ ने कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष हाजी जमीलुद्दीन, उनके भाई जलालुद्दीन और शहर के बिल्डर रिंकेश अग्रवाल को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। हाजी जमीलुद्दीन का कहना है कि अभी नोटिस नहीं मिला है। नोटिस मिला तो जांच में सहयोग करेंगे। एसटीएफ द्वारा जिन अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम लिए जा रहे हैं, उनके खिलाफ भी दस्तावेज़ और फोन/रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की पड़ताल की  जा रही है।

जिले में हथियार-लाइसेंस के आंकड़े 

आयुध विभाग के अनुसार जिले में कुल लाइसेंसी 52,000 हैं, जिनमें शहर में लगभग 22,000 और ग्रामीण क्षेत्रों में 28,000 लाइसेंस पंजीकृत हैं। पिस्टल/रिवॉल्वर के लाइसेंस लगभग 10,000 हैं। पिछले एक वर्ष में मिली शिकायतों की जिले ने जांच कराई है, पर अब इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद समूचे सिस्टम की सख्ती से समीक्षा की जा रही है।

संभावित पहल और सार्वजनिक चिंता

आयुध कार्यालय से मांगे गए दस्तावेजों के मिलते ही एसटीएफ रजिस्टर-शैली, सत्यापन चेकलिस्ट और लाइसेंस जारी करने के क्रम की तिथियों की मिलान करेगी। बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों के मामले में खेली गई भूमिका और किसी भी तरह की मिलीभगत की पड़ताल की जाएगी। यदि यूनिक आईडी या अन्य सत्यापन तंत्र में कमियां  पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई संभव है।

सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर और प्रभावशाली नामों के भी सामने आने की आशंका है, जिससे मामले का पॉलिटिकल व प्रशासनिक तापमान बढ़ सकता है। आगरा में हथियार लाइसेंस घोटाले की उठती परतें सिर्फ कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं दिखतीं। यह सिस्टमेटिक परीक्षण और सत्यापन के फॉलो-अप की मांग करती है। एसटीएफ द्वारा नोटिस, दस्तावेजों की मांग और बाहरी खिलाड़ियों के रिकॉर्ड की पड़ताल यह संकेत देती है कि मामला व्यापक और जटिल है। अदालती और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में यह जांच निर्णायक मोड़ पर है। जनता और सुरक्षा तंत्र दोनों को इसका परिणाम ध्यानपूर्वक देखने की आवश्यकता है।