महाशिवरात्रि पर शिवमय हुआ आगरा, शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

महाशिवरात्रि पर आगरा के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों को भव्य सजावट से सजाया गया और जलाभिषेक-दुग्धाभिषेक की विशेष व्यवस्थाएं की गईं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह शिव-पार्वती विवाह की रात्रि है, जो प्रेम, तपस्या और सृष्टि संतुलन का प्रतीक है। प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। व्रत पारण का शुभ समय 16 फरवरी को सुबह 06:42 से दोपहर 03:10 बजे तक निर्धारित है।

Feb 15, 2026 - 11:20
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महाशिवरात्रि पर शिवमय हुआ आगरा, शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब
शिवालयों में लगी भीड़ और सुरक्षा में तैनात पुलिस।

प्रमुख मंदिरों में सुबह से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

आगरा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आगरा पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही शहर के प्रमुख शिवालयों पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, कैलाश महादेव मंदिर, बलकेश्वर महादेव मंदिर, राजेश्वर महादेव मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और रावली महादेव मंदिर सहित सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है।

मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुईं हैं। जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं हैं। शिवालयों को भव्य फूल बंगले से सजाया गया है और देर रात महाआरती का भव्य आयोजन होगा। “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

शिव और शक्ति के दिव्य मिलन की पावन रात्रि

शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिव और शक्ति, प्रकृति और पुरुष के दिव्य मिलन की रात्रि है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव वैराग्य में लीन हो गए थे। बाद में सती ने पर्वतराज हिमालय के घर ‘पार्वती’ रूप में जन्म लिया। शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने हजारों वर्षों तक कठोर तप किया। उनकी अटूट साधना और समर्पण से प्रसन्न होकर भोलेनाथ विवाह के लिए तैयार हुए।

अनोखी बारात और ‘चंद्रशेखर’ स्वरूप

विवाह के दिन देवता, गंधर्व और अप्सराएं सुसज्जित होकर पहुंचे, लेकिन दूल्हे शिव का स्वरूप निराला था। भस्म रमाए, गले में सर्प, नंदी पर सवार और साथ में भूत-प्रेतों की बारात। यह रौद्र रूप देखकर माता पार्वती की माता मैना देवी मूर्छित हो गईं। स्थिति को संभालने के लिए माता पार्वती के आग्रह पर महादेव ने अपना मनोहर ‘चंद्रशेखर’ स्वरूप धारण किया, जो करोड़ों कामदेवों से भी अधिक सुंदर बताया गया है। इसके बाद विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ। यही मिलन सृष्टि के संतुलन और प्रेम की सर्वोच्चता का प्रतीक बना।

व्रत पारण का शुभ मुहूर्त

जो श्रद्धालु 15 फरवरी को व्रत रख रहे हैं, वे 16 फरवरी 2026 को प्रातः 06:42 बजे से दोपहर 03:10 बजे के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं। पारण से पूर्व स्नान कर भगवान शिव को जल अर्पित करना शुभ माना गया है। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग सहित कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ गया है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मंदिर परिसरों और आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि प्रमुख मंदिरों के आसपास ट्रैफिक जाम से बचाव के लिए विशेष रूट डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है, जिससे श्रद्धालु शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर सकें।