आगराः ‘बेस्ट प्रोफेसर’ बन रहे विश्वविद्यालय की बदनामी का कारण, आरोपों की फेहरिस्त में चमकते कई नाम
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के जिन शिक्षकों को बेस्ट प्रोफेसर का तमगा देकर सम्मानित किया गया, वही अब विश्वविद्यालय की छवि पर कलंक बनते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि एक के बाद एक ऐसे प्रोफेसरों पर छात्राओं के शोषण, भ्रष्टाचार और अनैतिक गतिविधियों के आरोप लग रहे हैं, जिन्हें कुलाधिपति के हाथों सम्मानित कराया जा चुका है। बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड विश्वविद्यालय के गौरव का प्रतीक होना चाहिए था, पर अब यही विवि की बदनामी का कारण बन रहे हैं।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन के बेस्ट प्रोफेसर चयन की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है। हाल ही में रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर गौतम जैसवार को बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड दिया गया था। अब उन्हीं पर एक शोध छात्रा ने न्यू आगरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का आरोप है कि प्रोफेसर ने दो साल तक शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया, खजुराहो और बरसाना के होटलों में दुष्कर्म किया, कार्यालय में बुलाकर छेड़छाड़ की और मोबाइल तोड़ने की कोशिश की।
अब पुलिस छात्रा के आरोपों की जांच कर रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपनी छवि बचाने के लिए प्रोफेसर गौतम जैसवार को निलंबित कर दिया है।
यह पहला मामला नहीं है। समाज विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर राजीव वर्मा पर भी दो वर्ष पूर्व छात्रा ने अश्लील हरकतें करने और क्लासरूम में दबोचने का आरोप लगाया था। शिकायत दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय ने छात्रा पर दबाव डालकर राजीनामा करा दिया था। इन्हीं प्रोफेसर वर्मा को भी बेस्ट प्रोफेसर का अवार्ड दिया गया था। इस मामले में राजीनामे के बाद सवाल यह उठता है कि यदि छात्रा के आरोप झूठे थे तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी। यदि आरोप सही थे तो तो फिर शिक्षक को फिर अवार्ड क्यों मिला?
इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय के दो अन्य बेस्ट प्रोफेसर भी विजिलेंस जांच के दायरे में हैं। एक की नियुक्ति प्रक्रिया की जांच चल रही है, जबकि दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं। विजिलेंस ने अभियोजन की स्वीकृति के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा, मगर अनुमति देने के बजाय विवि ने उसी प्रोफेसर को सीनियर प्रोफेसर पद पर प्रमोशन दे दिया है। सवाल यह है कि अगर प्रोफेसर पर भ्रष्टाचार का केस चला तो इनका प्रमोशन करने वाले अधिकारी कैसे खुद के फैसले को सही साबित करेंगे।
बेस्ट प्रोफेसर का खिताब अब विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। विवि की छवि को चमकाने के बजाय यह अवार्ड अब उस पर धब्बा साबित हो रहा है।