आगरा में डिप्टी सीएम के सामने भाजपाइयों ने रोया पुलिस का दुखड़ा, बोले- थाने निरंकुश हो गये हैं
आगरा। बीते कल दोपहर बाद आगरा पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जब पार्टी कार्यालय पर भाजपाइयों से आगरा की स्थिति के बारे में फीडबैक लिया तो सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे को लेकर हुईं। डिप्टी सीएम को बताया गया कि कमिश्नरेट में अधिकारी तो सुनते हैं, पर थानों के स्तर पर पुलिस निरंकुश हो गई है। थानों में दलाल प्रवृत्ति के लोग हावी हैं। कुछ अधिकारियों को लेकर भी शिकायत की गई कि वे पीड़ितों को टरका देते हैं।
इसके साथ ही यह पीड़ा भी बयां की गई कि आम जनता तो दूर, कार्यकर्ताओं तक की कोई सुनवाई नहीं हो रही। कार्यकर्ताओं के गिरे मनोबल को देख डिप्टी सीएम भी चिंतित दिखे। उन्होंने पुलिस अफसरों को सुधार लाने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना है कि आने वाले दिनों में आगरा पुलिस कमिश्रनरेट में सुधार दिखता है या नहीं?
भाजपा कार्यालय से डिप्टी सीएम के जाने के बाद वहां मौजूद रहे भाजपाई आपस में भी यही चर्चा करते रहे कि चुनाव के समय वह कैसे जनता से वोट मांगेंगे। इन भाजपाइयों की एक ही चिंता थी कि पुलिस की कार्यशैली पार्टी की छवि को बहुत खराब कर रही है।
आगरा कमिश्नरेट की बात करें तो यहां पर आए दिन पुलिस के कारनामे सामने आते रहे हैं। अमानवीय व्यवहार की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। पिछले दिनों डीजीपी राजीव कृष्ण ने भी कहा था कि प्रदेश में आगरा सहित छह शहरों की स्थिति बहुत खराब है और सबसे ज्यादा शिकायतें आगरा पुलिस की हैं। शायद इसी वजह से शनिवार को डिप्टी सीएम के सामने भी भाजपाइयों का सबसे ज्यादा दर्द पुलिस को लेकर छलका। कई वरिष्ठ नेताओं ने थानों में भ्रष्टाचार और दलाली के चरम पर होने की शिकायत की।
आगरा में पुलिस की स्थिति यह है कि एक गुमशुदा बेटी के पिता ने 22 दिन तक ताजगंज थाना पुलिस के चक्कर लगाए। पुलिस ने साधारण गुमशुदगी दर्ज कर इतिश्री कर ली, युवती को खोजने का कोई प्रयास नहीं किया। जबकि पिता ने मतांतरण होने की आशंका जताई थी। मजबूर पिता 22 दिन तक थाना-चौकी के चक्कर काटता रहा। इसके बाद वह आगरा के प्रभारी मंत्री व पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह से मिला और ताजगंज थाना पुलिस की शिकायत की। इसके बाद ही पुलिस इस मामले में सक्रिय हुई।
इसी तरह एक मुंशी की ट्रांस-यमुना थाने में तैनाती है। थाने में पर्स चोरी होने पर वह आठ दिन तक एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानाध्यक्ष से गुहार लगाता रहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों से मिलने के बाद ही मुकदमा दर्ज हुआ। इसी थाने में चोरी के एक केस में बिना पीड़ित को बताए एफआर लगा दी गई। जब महिला जानकारी लेने आई तो उसके साथ जो कुछ हुआ, वह पहले ही सामने आ चुका है। पीड़िता ने एक दरोगा पर आरोप क्या लगाए, महिला पुलिसकर्मियों से उसकी हाथापाई तक हो गई। इस मामले में जांच में दोनों ही पक्षों की गलती सामने आ चुकी है। पीड़िता का तो उसी दिन शांति भंग में चालान हो चुका है, लेकिन दोषी पाए गये पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ।
खेरागढ़ में थानाध्यक्ष सौरभ सिंह ने एक दंगल के दौरान लोगों को लातें मारीं, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ। आलोचनाओं के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
अपराध की स्थिति यह है कि सुबह सूरज निकलने से पहले ही बदमाश लूट की घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। ताजगंज थाना क्षेत्र में दो महीने के अंदर सुबह-सुबह चेन लूट की दो घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार तड़के खंदौली थाना क्षेत्र में भी लूट हो चुकी है।
जनप्रतिनिधियों की बात करें तो उनकी भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। फतेहाबाद के विधायक छोटेलाल वर्मा ने डौकी थानाध्यक्ष की कार्यशैली की शिकायत कर उन्हें हटाने की मांग की थी, लेकिन थानाध्यक्ष अब तक जमे हुए हैं। फतेहाबाद के अधिवक्ता भी डौकी थानाध्यक्ष को लेकर तीन दिन से हड़ताल पर हैं। आरोप है कि डौकी थानाध्यक्ष ने एक अधिवक्ता को उसके घर से उठाकर मारपीट की और फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया। यही थानाध्यक्ष तब भी चर्चा में थे जब संजय पुलिस चौकी प्रभारी रहते करणी सेना के कार्यकर्ताओं को पीटा था।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी बदहाल है। एसी कमरों में बैठकर ट्रैफिक सुधार की मीटिंग तो बहुत हो रही हैं लेकिन धरातल पर कोई प्रयास नहीं दिखता। पांच मिनट का सफर तय करने में जनता को आधा घंटा लग रहा है। शहर में जाम के विकराल हालात हैं। आदेश दिए गए थे कि ट्रैफिक पुलिस के साथ थाना पुलिस भी जाम खुलवाने में लगेगी लेकिन यह सिर्फ आदेशों तक सीमित रहा।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने पिछले दिनों खुद चेक किया कि थाना पुलिस सड़क पर तैनात रहती है या नहीं। उन्होंने पाया कि न्यू आगरा थाने के तीन दरोगाओं की भगवान टॉकीज पर ड्यूटी लगी थी लेकिन वे ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद तीनों को निलंबित कर दिया गया था।