आगराः महाराष्ट्र समाज के गणेशोत्सव में इप्टा की रंगारंग प्रस्तुतियां, नृत्य, नाटक और गीतों का संगम

आगरा। महाराष्ट्र समाज, आगरा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गणेशोत्सव के दूसरे दिन ग्रांड होटल, आगरा कैंट में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आगरा ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का निर्देशन दिलीप रघुवंशी ने किया।

Aug 29, 2025 - 13:29
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आगराः महाराष्ट्र समाज के गणेशोत्सव में इप्टा की रंगारंग प्रस्तुतियां, नृत्य, नाटक और गीतों का संगम
महाराष्ट्र समाज, आगरा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गणेशोत्सव के दूसरे दिन ग्रांड होटल में प्रस्तुति देते कलाकार।

गणेश वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुति

कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश आरती से हुआ। इसके बाद इप्टा आगरा ने नाट्य पितामह राजेंद्र रघुवंशी रचित गणेश वंदना ‘हे शुभ वदन गौरी नंदन…’ प्रस्तुत की। गीतकार शैलेन्द्र का समूह गीत ‘तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर…’ भी गाया गया। मराठी गीतों के साथ हिमाद्रि हंडियेकर ने मराठी गणेश वंदना और हिंदी गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया।

अतिथियों का स्वागत और ऐतिहासिक संदर्भ

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार एवं समाजसेवी अरुण डंग तथा रंगकर्मी एवं शिक्षाविद प्रो. ज्योत्स्ना रघुवंशी का स्वागत महाराष्ट्र समाज के पूर्व अध्यक्ष अभय पोताडे ने किया। प्रो. रघुवंशी ने कहा कि 1893 में लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव को घरों से निकालकर सार्वजनिक स्वरूप दिया था, जिसने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उसी परंपरा को इप्टा और महाराष्ट्र समाज ने आगे बढ़ाया है।

हास्य नाटक और संगीत

हास्य नाटक ‘ज्योतिष के चमत्कार’ का प्रभावी मंचन हुआ। नाटक के लेखक घनश्याम गोयल और दिलीप रघुवंशी हैं तथा निर्देशन भी दिलीप रघुवंशी ने किया। कलाकारों में असलम खान, पार्थो सेन, जय कुमार, सूर्य देव, समीर ने अभिनय किया। मेकअप कुमकुम रघुवंशी ने किया।
संगीत में परमानंद शर्मा, भगवान स्वरूप, सूर्य देव ने गजल, मल्हार, मराठी, सूफी और उपशास्त्रीय गीत गाए। राजू ने ढोलक पर संगत दी।

स्मृति चिन्ह और सहयोग

मुख्य अतिथि अरुण डंग ने महाराष्ट्र समाज, आगरा की ओर से इप्टा कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। मंच संचालन यशस्विनी सोवनी ने किया। प्रमुख सहयोग में निरंजन पराड़कर, नितिन सोवनी, दिवाकर मोखरीवाले का योगदान रहा। आभार नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप साने ने व्यक्त किया।

इनकी उपस्थिति उल्लेखनीय रही

गणेशोत्सव का समापन कवि गोपाल दास नीरज के गीत ‘इसीलिए तो नगर नगर बदनाम हो गए मेरे आंसू…’ से हुआ। इस मौके पर डॉ. अविनाश चिवटे, अशोक करमरकर, सुरेश करमरकर, श्रीमती नम्रता पराड़कर, सुनीता मोखरीवाले, डॉ. स्मिता साने, अंजलि करमरकर, डॉ. नीता चिवटे, प्रभाकर शेंडेकर आदि मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor