आगराः सिंधु सेवा संगम की टीजड़ी मेहंदी नाइट में रंग, राग और रौनक का संगम
आगरा। सावन के उत्सवों में अपनी अलग पहचान रखने वाली टीजड़ी मेहंदी नाइट का आयोजन रविवार शाम सिंधु सेवा संगम द्वारा बड़े ही उत्साह और पारंपरिक रंग-राग के साथ किया गया। कार्यक्रम स्थल पर जैसे ही शाम ढली, माहौल में खुशबू, संगीत और सजावट की रौनक घुल गई।
रंग-बिरंगी मेंहदी और पारंपरिक गीत
महिलाओं और युवतियों ने हाथों पर सुंदर-सुंदर डिज़ाइन वाली मेंहदी सजवाई। डिजाइनर मेंहदी कलाकारों ने पारंपरिक बेल-बूटों से लेकर आधुनिक पैटर्न तक, हर मनपसंद डिज़ाइन को बारीकी से उकेरा। इस दौरान सिंधी लोकगीतों, सावन के झूलों और दुल्हन तैयारियों पर आधारित गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत कर दिया।
झूला, गीत और सजावट में बसी सिंधी संस्कृति
संगम के सदस्यों ने रंगीन फूलों और लाइटिंग से सजाए गए झूलों की व्यवस्था की, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में झूलों का आनंद लेती दिखीं। मंच से गूंजते गीतों में ‘झूलो रे झूलो’ और ‘आयो सावन झूलन’ ने सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
संस्कृति संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश
सिंधु सेवा संगम की अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी संस्कृति को सहेजते हैं बल्कि महिला समाज को एक मंच पर लाकर उनके हुनर को भी सामने लाते हैं। उन्होंने बताया कि यह उत्सव सिंधी समाज के आपसी भाईचारे और सामूहिक उत्साह का प्रतीक है।
समापन पर सामूहिक नृत्य और पारंपरिक व्यंजन
कार्यक्रम का समापन सिंधी गीतों पर सामूहिक नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों के साथ हुआ। दाल-पकवान, कुक्कर करी और ठंडाई जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों ने सभी के स्वाद को और भी मीठा कर दिया।
मंगलवार को महिलाएं रखेंगी व्रत
टीजड़ी पर्व करवा चौथ जैसा त्यौहार है। महिलाएं सोलह सिंगार करके टीजड़ी माता की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाएं कठोर उपवास रखती हैं जल और अन्न दोनों का त्याग करती हैं। सुहागिन के अलावा ये व्रत वो स्त्रियां भी रखती हैं जिनकी शादी तय हो चुकी है। मीडिया प्रभारी मेघराज दियालानी ने बताया कि महिलाएं तड़के उठकर कोकी, मीठी मानी बनाकर अल्पाहार करेगी। दिनभर निराहार रहेगी और दोपहर में कथा सुनेंगी, टीजड़ी माता को हिंडोले (झूले)में झुलाएंगी।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में भाविका दियालानी, मधु माखीजा, रश्मि बुधरानी, सिद्धि आयलानी, नैना जेठवानी, आशा माखीजा पूजा सेवकानी ने अहम् भूमिका निभाई।
इनकी रही मौजूदगी
इस दौरान डॉ कैलाश विशवानी,सूर्य प्रकाश, मेघराज दियालानी,चंद्र सोनी, घनश्याम दास देवनानी, घिरधारी लाल भगतियानी, प्रकाश केशवानी, जय मदनानी, राम चंद शब्रिया, अमृत माखीजा, किशोर बुधरानी, विकास जेठवानी, ईश्वर सेवकानी, सुंदर हरजानी, रोहित आयलानी, कुनाल जेठवानी, बंटी महाराज, महाराज जय किशन बुधरानी,भजन माखीजा, मेघराज शर्मा, राजू खेमानी, खेमचंद तेजानी, इंद्र तुलसानी, शंकर जगवानी, राम चंद हसानी, मुकेश सबानी, सोनू मदनानी कपिल पंजवानी, विक्रम हिंदवानी, हरेश पंजवानी, मुखी भाई सुनील बुधरानी, किशोर मेहता, पवन बत्रा, जगदीश कुकरेजा आदि मौजूद रहे।