आगरा का धर्मांतरण मामलाः कोड 1301 का इस्तेमाल करता था गैंग, कश्मीर से कोलकाता तक फैला है जाल

आगरा। आगरा में उजागर हुए धर्मांतरण गैंग के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ तो उजागर हो ही चुका है। जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क को पांच ऐसे देशों से फंडिंग मिल रही थी, जो भारत में इस्लामिक विस्तारवाद को बढ़ावा देना चाहते हैं। इन देशों से डिजिटल माध्यमों से फंड ट्रांसफर किया जाता था। इसी फंड से पूरे अभियान को संचालित किया जा रहा था। यह भी खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क 1301 नंबर कोड का इस्तेमाल करता था।

Jul 20, 2025 - 18:48
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आगरा का धर्मांतरण मामलाः कोड 1301 का इस्तेमाल करता था गैंग, कश्मीर से कोलकाता तक फैला है जाल
आगरा धर्मांतरण केस से जुड़ा एक आरोपी पुलिस गिरफ्त में, जिसे पर रिमांड पर लिया गया है।

-अंतरराष्ट्रीय फंडिंग से जुड़े तार, आयशा देती थी धर्मांतरण कराने पर पैसा, आयशा के एकाउंट में भोपाल का दाऊद पैसा भेजता था

कई राज्यों में पुलिस रेड, 10 गिरफ्तार

आगरा पुलिस ने धर्मांतरण गैंग पर बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत के कई राज्यों में छापेमारी की थी।  इस दौरान दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि गैंग का मास्टरमाइंड अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। डीजीपी राजीव कृष्ण स्वयं इस पूरे ऑपरेशन पर निगरानी रखे हुए हैं और हर अपडेट सीधे उन्हें दिया जा रहा है। यूपी एटीएस पकड़ में आ चुके उन दो आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जो नेटवर्क में खासी अहमियत रखते थे।

अभी तक की पूछताछ में पता चला है कि आयशा नामक लड़की के एकाउंट में पैसा आता है। अब 32 लाख रुपये एकाउंट में आने का पता चल चुका है। विदेशों से मिल रहे फंड से ही आयशा उन लोगों को पैसे देती थी जो धर्मांतरण कराने में सफल रहते थे। यह भी खुलासा हुआ है कि आयशा के एकाउंट में भोपाल का दाऊद पैसे भेजता था। यह नेटवर्क आईएसआईएस के मॊडल पर काम कर रहा था।

कॉलेज से शुरू हुई ‘ब्रेनवॉश’ की कहानी

यह मामला साल 2021 में तब शुरू हुआ, जब आगरा के डीईआई में एमफिल कर रही सदर क्षेत्र के एक परिवार की लड़की की दोस्ती कश्मीर की रहने वाली खुशबू उर्फ साइमा से हुई। साइमा ने इस्लाम की अच्छाइयों के नाम पर आगरा की लड़की का माइंडसेट बदलना शुरू किया। वह हिजाब, नमाज और शरीयत के बारे में वीडियो दिखा-दिखाकर मुस्कान को प्रभावित करती थी। साइमा ने युवती को हिंदी में अनुवादित कुछ किताबें भी दीं। इस युवती की घर के पास एक मस्जिद भी है। मस्जिद से जब अजान होती तो यह युवती अपने घर पर नमाज पढने लगती थी।

घर में पूजा रोक नमाज शुरू की

कुछ ही महीनों में यह लड़की इस्लाम से प्रभावित हो चुकी थी। पहले उसने छुपकर नमाज पढ़नी शुरू की और फिर खुले तौर पर अपने परिवार से पूजा-पाठ का विरोध करने लगी। एक दिन उसने अपनी मां को मंदिर में पूजा करने से मना करने लगी और कहा कि इससे कुछ नहीं होगा, अल्लाह को याद करो। अल्लाह ही बरकत देगा। युवती ने अपनी मां के सामने इस्लामिक किताबें भी रख दीं और कहा कि इन्हें पढ़ा करो। यह सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा फिल्म द केरला स्टोरी में दिखाया गया है।

घर छोड़ भागने की पहली कोशिश

2021 में मुस्कान घरवालों को बिना बताए जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर निकल गई थी। वहां रास्ते में लैंडस्लाइड में फंसने के बाद उसने खुद ही अपने पिता को फोन किया, जो उसे वापस लेकर आए। उस वक्त उसने असली कारण नहीं बताया।

छोटी बहन को भी बनाया शिकार

घरवालों ने जब ब़ड़ी बेटी पर पाबंदी लगाई तो उसने अपनी छोटी बहन को साधन बना लिया। उसका मोबाइल इस्तेमाल करने लगी और धीरे-धीरे उसका भी माइंडसेट बदलना शुरू किया। छोटी बहन भी इस्लामिक वीडियो देखने लगी और बहन के साथ धर्म परिवर्तन की बातचीत में शामिल हो गई।

रीत बनिक उर्फ इब्राहिम से संपर्क

साइमा को जब यह पता चला कि जिस युवती को वह इस्लाम के रास्ते पर ले जा रही है, उस पर बंदिशें लग चुकी हैं तो फिर उसने दोनों बहनों को आगरा से निकालने की प्लानिंग की। साइमा ने दोनों बहनों को कोलकाता के एक व्यक्ति रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम का नंबर दिया। वह सोशल मीडिया पर धर्मांतरण से जुड़ी पोस्ट करता था। इंस्टाग्राम के जरिए दोनों बहनों की रीत से बात होने लगी। उसने दोनों को कहा कि इस्लाम अपनाओ, फिर नई जिंदगी शुरू होगी। रीत ने ही पूरी योजना बनाई और दोनों बहनों के लिए इस्लाम कबूल कराने की स्क्रिप्ट तैयार की।

इस्लाम कबूल और फरारी

24 मार्च 2025 को जब परिजन दिल्ली गए थे, उसी दिन दोनों बहनें घर से फरार हो गईं। पहले एक शख्स ने उन्हें मस्जिद ले जाकर कलमा पढ़वाया, फिर दिल्ली भेजा गया। वहां से बिहार और फिर कोलकाता पहुंचीं। कोलकाता में मौलवी के सामने दोनों ने "शाहदा" पढ़ी और कानूनी रूप से इस्लाम कबूल कर लिया।

नए नाम, नया जीवन, नई साजिश

धर्मांतरण के बाद बड़ी बहन का नाम अमीना, और छोटी बहन का नाम जोया रखा गया। दोनों को मुस्लिम बस्ती में रुकवाया गया, जहां वे बुर्का पहनकर रहती थीं। गैंग उनके निकाह की तैयारी करा रहा था। यही नहीं, गैंग के इशारे पर सोशल मीडिया पर दोनों इस्लाम के समर्थन में अभियान चलाने लगी थीं। आगरा पुलिस ने दोनों बहनों को कोलकाता से ही बरामद किया है।

पुलिस की सख्त निगरानी, जल्द और गिरफ्तारियां

डीजीपी राजीव कृष्ण इस मामले को सीधे मॉनिटर कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों का मानना है कि इस नेटवर्क में कई और चेहरे जुड़े हुए हैं, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। यह मामला देश में संगठित धर्मांतरण नेटवर्क का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

निष्कर्ष

आगरा से शुरू हुआ यह मामला अब अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साजिश की तस्वीर दिखा रहा है। यह केवल दो बहनों का धर्मांतरण नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक संरचना को कमजोर करने की एक गहरी साजिश का हिस्सा है।

SP_Singh AURGURU Editor