सुरों में डूबी आगरा की शामः गुरुवर संगीत समारोह में पं. अर्नब चटर्जी की गायकी ने रचा आध्यात्मिक समां, शास्त्रीय संगीत ने छुआ आत्मा का तार
आगरा। केंद्रीय हिंदी संस्थान में शुक्रवार को आयोजित गुरुवर संगीत समारोह 2026 की शाम शास्त्रीय संगीत की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही, जहां देश के ख्याति प्राप्त कलाकारों ने अपनी अनुपम प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय संगीतालय द्वारा आयोजित यह समारोह गुरु-शिष्य परंपरा, सांगीतिक साधना और युवा प्रतिभाओं के उत्कर्ष का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
1944 से शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार में समर्पित भारतीय संगीतालय ने अपने संस्थापक पं. गोपाल लक्ष्मण गुणे, पं. पुरुषोत्तम माधव पालखे एवं पं. सीताराम व्यवहारे जैसे महान गुरुजनों को स्मरण करते हुए इस आयोजन को उन्हें समर्पित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नेशनल चैंबर के पूर्व अध्य़क्ष अनिल वर्मा रहे, जबकि अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बबीता साहू ने की।

संस्था के संरक्षक एवं वरिष्ठ संगीतज्ञ पं. नरेश मल्होत्रा ने शास्त्रीय संगीत की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं सचिव अशोक राव करमरकर ने संस्था की भावी योजनाओं को साझा किया। प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह चौहान ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम की शुरुआत स्व. कुंवर चन्द भूषण सिंह को श्रद्धांजलि के साथ हुई।
समारोह का मुख्य आकर्षण कोलकाता से आए सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं. अर्नब चटर्जी रहे, जिन्होंने राग रागेश्री में विलंबित ख्याल ‘आज मिल रघुनाथ दाता...’ से गायन की शुरुआत की। इसके बाद ‘सुंदर नवेली नार...’ और ‘देखो श्याम गहलीनो बैया मोरी...’ जैसी बंदिशों के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। राग बहार में “सकल बन फूल रहे सरसों...” की प्रस्तुति ने वातावरण में उल्लास भर दिया, जबकि राग खमाज की ठुमरी ‘प्रेम अगनवा जिया जलावे...’ ने प्रेम और संवेदना की गहराई को स्पर्श किया।
उनके साथ दिल्ली के प्रसिद्ध तबला वादक दुर्जेय भौमिक ने सधी हुई संगत दी, वहीं आगरा के पंडित टी. रविन्द्र ने संवादिनी पर मधुर संगत कर प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।

स्थानीय युवा कलाकार सागर जग्गी ने राग शुद्ध कल्याण में अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। उनके साथ तबला पर हरिओम माहौर एवं संवादिनी पर डॉ. राहुल निवेरिया ने सराहनीय संगत दी। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संगीतालय के 50 छात्र-छात्राओं द्वारा राग हेमंत में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसमें तबला पर डॊ. भानु प्रताप सिंह और हारमोनियम पर डॉ. वंदना वरुण ने संगत की।
मंच संचालन लीना परमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजिका संजीवनी द्वारा प्रस्तुत किया गया। मीडिया समन्वयक डॉ. महेश धाकड़ के अनुसार कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित संगीतकार, कला मर्मज्ञ, बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. अमिता त्रिपाठी, डॉ. गिरधर शर्मा, विलास पालखे, वीना छाबड़ा, राज बहादुर राज, यतेन्द्र सोलंकी, आभा सिंह गुप्ता, रितु-रजनीश खण्डेलवाल, ठा. विजय पाल सिंह एडवोकेट, दिलीप रघुवंशी, पं. देवाशीष चक्रवर्ती, पं. सदानंद ब्रह्मभट्ट, प्रतिभा तलेगांवकर, प्रहलाद, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, रवि अग्रवाल, प्रार्थना, ललिता आहूजा, गीता मलहोत्रा, परमानंद, विवेक जैन, अरविंद दोहरे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।