आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अब रात में होगी 75 किमी प्रति घंटा की नई गति सीमा
लखनऊ। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीड़ा) ने बड़ा कदम उठाया है। सर्दियों के दौरान अब इस एक्सप्रेसवे पर रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किमी से घटाकर 75 किमी प्रति घंटा कर दी जाएगी। यह वही सीमा होगी जो यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है।
यूपीड़ा बनाएगा राष्ट्रीय स्तर का रोड सेफ्टी मॉडल
लखनऊ। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीड़ा) ने बड़ा कदम उठाया है। सर्दियों के दौरान अब इस एक्सप्रेसवे पर रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किमी से घटाकर 75 किमी प्रति घंटा कर दी जाएगी। यह वही सीमा होगी जो यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है।
यूपीड़ा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक कुमार (आईएएस) की अध्यक्षता में 10 नवंबर को लखनऊ पिकअप भवन में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कई ठोस सुझाव रखे, जिन पर प्राधिकरण ने सहमति जताई।
ड्रोन से होगी हर दुर्घटना की रिकॉर्डिंग
अब एक्सप्रेसवे पर होने वाली हर दुर्घटना की ड्रोन कैमरे से रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके। इसके साथ ही यूपीड़ा ने यह भी निर्णय लिया है कि एक्सप्रेसवे का नया रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। पिछला ऑडिट वर्ष 2019 में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) द्वारा किया गया था। यातायात की मौजूदा स्थिति में भारी बदलाव को देखते हुए आईआईटी दिल्ली या सीआरआरआई जैसी स्वतंत्र संस्था से नया ऑडिट कराया जाएगा।
हादसों के आंकड़े और कारण
वर्ष 2021 से 2025 के बीच आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 7,024 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें 811 लोगों की मौत हुई, जबकि 8,355 घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार 54.7 प्रतिशत हादसे ड्राइवर की झपकी या थकान के कारण हुए। यूपीड़ा का लक्ष्य अब केवल गति नहीं, बल्कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। अधिवक्ता जैन ने कहा कि केवल तेज़ी को प्रगति नहीं कहा जा सकता, असली प्रगति सुरक्षा में है। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे को ‘मौत का गलियारा’ नहीं, बल्कि ‘जीवन का मार्ग’ बनाना होगा।
90 करोड़ की लागत से लगेगा मीडियन क्रैश बैरियर
बैठक में यह भी तय हुआ कि एक्सप्रेसवे के सेंट्रल मीडियन पर मजबूत क्रैश बैरियर लगाया जाएगा, जिसकी लागत लगभग ₹90 करोड़ होगी। इससे किसी भी हादसे की स्थिति में वाहन दूसरी दिशा में न जा सके। साथ ही यूपीड़ा ने निर्णय लिया है कि हर 50 किलोमीटर पर “ड्राइवर वेलनेस जोन” बनाए जाएंगे, जहां रात में ठहरने, भोजन और चाय की सस्ती सुविधा उपलब्ध होगी। थकान जनित हादसों को रोकने के लिए यह योजना बेहद कारगर मानी जा रही है।
ई–मॉनिटरिंग सिस्टम होगा हाईटेक
अब केवल गति सीमा उल्लंघन पर ही नहीं, बल्कि लेन अनुशासन, ओवरलोडिंग, मोबाइल फोन का उपयोग, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट, त्रि–स्वारी जैसे सभी ट्रैफिक उल्लंघनों की स्वचालित ई–मॉनिटरिंग की जाएगी। कैमरे और लेज़र–आधारित इंटरसेप्टर वाहन भी लगाए जाएंगे। मई 2025 तक केवल 0.41 प्रतिशत वाहनों पर चालान हुए थे, जिसे अब बढ़ाकर तकनीकी आधार पर 100% अनुपालन की दिशा में लाने की तैयारी है।
रिकॉर्ड करो, हटाने से पहले
हादसे के बाद वाहन हटाने से पहले स्थल की ड्रोन सर्वे से डिजिटल तस्वीरें ली जाएंगी। “रिकॉर्ड करो, हटाने से पहले” अभियान के तहत यह व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी। इससे दुर्घटना स्थल की वास्तविक परिस्थिति का तकनीकी विश्लेषण संभव होगा। साथ ही टोल प्लाज़ा और विश्राम स्थलों पर डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर हिंदी में चेतावनी संदेश “थकान के आगे कोई ब्रेक काम नहीं करता”,“अनधिकृत रुकना हादसे को बुलाना है”,“अपनी लेन में रहो, सुरक्षा रहेगी साथ” प्रदर्शित होंगे।
डेटा एनालिस्ट रखेगा रीयल–टाइम रिपोर्ट
यूपीड़ा मुख्यालय में एक समर्पित डेटा एनालिस्ट नियुक्त किया जाएगा, जो दुर्घटनाओं का रीयल–टाइम डेटाबेस तैयार करेगा और “एक्सीडेंट एंड रेस्पॉन्स डैशबोर्ड” बनाकर मासिक रिपोर्ट जारी करेगा। करीब 90 मिनट चली इस बैठक में सीईओ दीपक कुमार के साथ एचपी साही (अतिरिक्त सीईओ), एसके श्रीवास्तव (मुख्य सामान्य प्रबंधक) सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पेश किए गए प्रस्तावों को देखते हुए यूपीड़ा ने आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे को राष्ट्रीय स्तर का सुरक्षित अवसंरचना मॉडल बनाने का लक्ष्य तय किया है।