आगरा में पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज बोले- हिन्दू चेतना नहीं जागी तो फिर खंडित हो जाएगा भारत
आगरा। हिन्दू होना जितना गर्व का विषय है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी। यदि आज का हिन्दू समाज जागरूक नहीं हुआ और राष्ट्र से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ा, तो भारत पुनः खंडित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ सकता है। व्यक्तिगत भोग, लिप्सा और आत्मकेन्द्रित जीवन ने ही अतीत में भारत को कमजोर किया और बार-बार खंडन का मार्ग प्रशस्त किया। यह बात पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने कही। वे सैमरा में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे। कमला नगर स्थित समाजसेवी सौरभ गुप्ता के निवास पर मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान उनका वैदिक मंत्रोच्चारण, पुष्पवर्षा और आरती के साथ भव्य स्वागत किया गया।
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मीडिया से संवाद में महाराज जी ने कहा कि जब हम अपनी जिम्मेदारी भूलते हैं, तब केवल राष्ट्र ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी दुखों से भर जाता है। इतिहास साक्षी है कि हिन्दुओं की निष्क्रियता ने ही भारत को कई बार कमजोर किया।
संघ का शताब्दी वर्ष, आम हिन्दू का कार्यक्रम
महाराज जी ने स्पष्ट किया कि विराट हिन्दू सम्मेलन किसी संगठन विशेष का नहीं, बल्कि आम हिन्दू और राष्ट्रवादियों का आयोजन है। संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।
उन्होंने कहा कि एक साथ खड़े होकर चेतना सम्पन्न बनना होगा, स्वयं जागना और दूसरों को जगाना होगा। जब भारत हिन्दुओं के द्वारा पुष्पित, पल्लवित और पोषित होगा, तभी विश्व में शांति और आनंद की सुगंध फैलेगी। इसे उन्होंने राष्ट्रीय जागरण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सामूहिक उत्तरदायित्व का समय बताया।
बांग्लादेश आज, कल भारत न बन जाए
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के प्रश्न पर महाराज श्री ने दो टूक कहा कि आज जो वहां हो रहा है, वही कभी कंधार, लाहौर और सिंधु में हुआ था। बांग्लादेश उसी राह पर बढ़ रहा है।
उन्होंने चेताया कि मानवीय दृष्टि से बांग्लादेश की चिंता आवश्यक है, लेकिन उससे अधिक जरूरी है अपने देश की चिंता। जो दृश्य आज वहां दिख रहा है, कहीं कल वही भारत में न दिखे। यह जमीनी हकीकत और एतिहासिक चेतावनी दोनों है।
राष्ट्र कथा की आज सबसे अधिक आवश्यकता
राष्ट्र कथा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जैसे घर की छत मजबूत होगी तभी परिवार सुरक्षित रहेगा, वैसे ही राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो संस्कृति सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण भारत की आत्मा हैं। राष्ट्र सुरक्षित रहा तो राम कथा और कृष्ण कथा चलती रहेंगी। यदि राष्ट्र कमजोर हुआ तो जहां आज कथाएं हो रही हैं, वहां भी बंद हो जाएंगी। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत के कई हिस्सों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र कथा आज जरूरत बन चुकी है।
संविधान मनुष्य के लिए है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं
महाराज जी ने कहा कि हिन्दुत्व कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। भारत का स्वरूप स्वाभाविक रूप से हिन्दू राष्ट्र का है।
उन्होंने स्पष्ट किया— धर्म मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं। उसी प्रकार संविधान मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं।
संविधान में संशोधन को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर उन्होंने कहा कि अब तक सैकड़ों संशोधन हो चुके हैं। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा और जीवन पद्धति को बेहतर बनाने के लिए परिवर्तन आवश्यक है।
शिक्षार्थी नहीं, विद्यार्थी बने युवा
युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए महाराज जी ने कहा कि केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन पर्याप्त नहीं है, संस्कारों की शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा केवल शिक्षार्थी की नहीं, बल्कि विद्यार्थी की रही है। शिक्षा और विद्या में अंतर है। परीक्षा में असफलता से उत्पन्न अवसाद पर उन्होंने युवाओं से कहा कि कोई भी प्रयास अंतिम नहीं होता। असफलता से घबराएं नहीं, शॉर्टकट न अपनाएं। निरंतर प्रयास ही सफलता का मार्ग है।
महाराज जी के आगमन पर प्रमुख रूप से विजय सामा, शशि रंजन गुप्ता, शोभा गुप्ता, सौरभ गुप्ता, अर्पणा गुप्ता, सृष्टि गुप्ता, शौर्य गुप्ता, पुनीत अग्रवाल, सारिका अग्रवाल, पंकज शिप्रा मित्तल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।